HomeArchitectureBreakingकृत्रिम दूध मिलावट के संगठित रैकेट पर एफडीए का बड़ा प्रहार

कृत्रिम दूध मिलावट के संगठित रैकेट पर एफडीए का बड़ा प्रहार

पांच जिलों में एक साथ छापेमारी; 1.48 करोड़ रुपए का माल जब्त, 20 हजार लीटर संदिग्ध दूध नष्ट

26 आरोपियों पर मामला दर्ज, 13 गिरफ्तार; 5 फूड लाइसेंस निलंबित, 4 डेयरियां बंद

मुंबई। महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) और पुणे ग्रामीण पुलिस की स्थानीय अपराध शाखा ने कृत्रिम दूध मिलावट के संगठित गिरोह के खिलाफ राज्य की अब तक की सबसे बड़ी संयुक्त कार्रवाई करते हुए पांच जिलों में एक साथ छापेमारी की। इस कार्रवाई में करीब 1.48 करोड़ रुपये का माल जब्त, 20 हजार लीटर संदिग्ध दूध मौके पर ही नष्ट, 49 नमूने जांच के लिए एकत्र किए गए तथा 26 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। सोमवार को एफडीए के सह आयुक्त (खाद्य) ने बताया कि एफडीए को कृत्रिम दूध बनाने में इस्तेमाल होने वाले रसायनों की संगठित आपूर्ति को लेकर गुप्त सूचना मिली थी। प्रारंभिक जांच के बाद विभाग ने गुप्त निगरानी शुरू की। जांच में सामने आया कि स्किम्ड मिल्क पाउडर, व्हे/डेयरी परमीएट पाउडर, इमल्सीफायर, डिटर्जेंट, शैंपू और पाम ऑयल मिलाकर कृत्रिम दूध तैयार किया जा रहा था। बाद में इस मिश्रण को असली दूध में मिलाकर बाजार में बेचा जाता था। एफडीए ने केवल मिलावटी दूध जब्त करने तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी, बल्कि पूरे सप्लाई नेटवर्क का खुलासा किया। जांच में मुख्य सप्लायर, बिचौलिए, दूध संग्रह केंद्र, चिलिंग सेंटर और वितरण नेटवर्क की पहचान की गई। जांच में सुशांत बाबनराव हिंगे (मंचर) को मुख्य सरगना तथा संदीप लोढ़ा को पूरे नेटवर्क का सलाहकार पाया गया। मुख्य आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर 4 और 5 जुलाई 2026 को पुणे, अहिल्यानगर, सोलापुर, जालना और ठाणे जिलों में एक साथ छापेमारी की गई। इस अभियान के लिए एफडीए के लगभग 30 खाद्य सुरक्षा अधिकारियों और 40 पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों की विशेष टीमें गठित की गई थीं। छापेमारी के दौरान दूध संग्रह केंद्रों, चिलिंग सेंटरों, पैकिंग इकाइयों तथा कृत्रिम दूध बनाने वाले ठिकानों की तलाशी ली गई। कार्रवाई में 13 प्रतिष्ठानों पर छापे मारे गए और कृत्रिम दूध बनाने में उपयोग होने वाले रसायन, उपकरण, दस्तावेज, लेन-देन के रिकॉर्ड और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्य जब्त किए गए।
एफडीए ने सार्वजनिक स्वास्थ्य को तत्काल खतरा मानते हुए करीब 20 हजार लीटर संदिग्ध दूध को मौके पर ही नष्ट कर दिया, ताकि वह बाजार तक न पहुंच सके। इसके अलावा 49 खाद्य नमूने जांच के लिए एकत्र किए गए हैं। इस मामले में मंचर पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता, 2023 तथा खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। कुल 26 आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है, जिनमें से 13 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। सभी गिरफ्तार आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। अब आर्थिक लेन-देन, बैंक खातों, सप्लाई नेटवर्क और अन्य आरोपियों की भूमिका की गहन जांच की जा रही है। एफडीए ने आपराधिक कार्रवाई के साथ-साथ प्रशासनिक स्तर पर भी सख्त कदम उठाए हैं। पांच खाद्य व्यवसाय लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिए गए हैं, जबकि चार प्रतिष्ठानों को कारोबार बंद करने के आदेश जारी किए गए हैं। प्रयोगशाला की रिपोर्ट और आगे की जांच के आधार पर अतिरिक्त कार्रवाई की जाएगी।
महाराष्ट्र के खाद्य सुरक्षा आयुक्त तुकाराम मुंढे ने कहा कि दूध छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और मरीजों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण खाद्य पदार्थ है। ऐसे आवश्यक खाद्य पदार्थ में जानबूझकर रासायनिक मिलावट करना केवल कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि समाज के खिलाफ गंभीर अपराध है। ऐसे अपराधियों के प्रति किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई केवल मिलावटी दूध जब्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि मिलावट की पूरी सप्लाई चेन को खत्म करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। दूध उत्पादकों, रसायन आपूर्तिकर्ताओं, परिवहनकर्ताओं, बिचौलियों, संग्रह केंद्रों, चिलिंग सेंटरों और वितरण नेटवर्क तक पूरे गिरोह की जांच की जा रही है। एफडीए ने राज्य के सभी विभागीय अधिकारियों को खुफिया सूचनाओं के आधार पर विशेष अभियान तेज करने के निर्देश दिए हैं। दूध संग्रह केंद्रों, चिलिंग सेंटरों, प्रसंस्करण इकाइयों, गोदामों, परिवहन नेटवर्क और मिलावट में इस्तेमाल होने वाले रसायनों की आपूर्ति करने वाले तत्वों पर लगातार निगरानी रखी जाएगी। एफडीए ने नागरिकों से अपील की है कि यदि उन्हें दूध या किसी अन्य खाद्य पदार्थ में मिलावट की जानकारी मिले तो तुरंत विभाग को सूचित करें। सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति, संस्था या संगठित गिरोह के खिलाफ भविष्य में भी इसी तरह की खुफिया आधारित व्यापक और कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।

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