
मुंबई। अंधेरी स्थित गोल्डस्टार ज्वेलरी कंपनी में करोड़ों रुपये के गहनों की कथित चोरी का मामला पुलिस जांच में पूरी तरह उलट गया। मुंबई के एमआईडीसी पुलिस स्टेशन की टीम ने खुलासा किया है कि कंपनी के एक कर्मचारी ने अपने दोस्त के साथ मिलकर गहनों की चोरी का फर्जी नाटक रचा था। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर 60 लाख 65 हजार 656 रुपये मूल्य के गहने शत-प्रतिशत बरामद कर लिए हैं।एमआईडीसी पुलिस स्टेशन में दर्ज अपराध क्रमांक 635/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(4) और 3(5) के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता कंचन पवार (46), जो गोल्डस्टार ज्वेलरी कंपनी से जुड़ी हैं, ने पुलिस को घटना की जानकारी दी थी।पुलिस के अनुसार कंपनी कर्मचारी अविनाश गंगाधर कदम (26) को ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए करीब 60.65 लाख रुपये के गहने सौंपे गए थे। बाद में उसने दावा किया कि रास्ते में उसकी बाइक दुर्घटनाग्रस्त हो गई, वह बेहोश हो गया और इसी दौरान अज्ञात लोगों ने गहनों से भरा बैग चोरी कर लिया। अपने दावे को विश्वसनीय बनाने के लिए वह अस्पताल में भर्ती भी हो गया। हालांकि पुलिस को शुरुआत से ही उसकी कहानी में कई विरोधाभास नजर आए। कथित दुर्घटना के बावजूद उसके शरीर पर गंभीर चोटों के निशान नहीं थे। संदेह होने पर एमआईडीसी पुलिस ने विस्तृत जांच शुरू की और घटनास्थल तथा आसपास के क्षेत्रों के सैकड़ों सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली।तकनीकी विश्लेषण और सीसीटीवी जांच के दौरान पुलिस को एक संदिग्ध व्यक्ति की गतिविधियां दिखाई दीं। जांच आगे बढ़ने पर उसकी पहचान मनोज हनुमंत जोगदंड (41) के रूप में हुई। हिरासत में लेकर पूछताछ करने पर पुलिस ने दोनों आरोपियों को आमने-सामने बैठाया, जिसके बाद पूरे षड्यंत्र का खुलासा हो गया। पूछताछ में दोनों ने स्वीकार किया कि उन्होंने पहले से योजना बनाकर चोरी का नाटक रचा था। पुलिस जांच में सामने आया कि अविनाश कदम कंपनी का विश्वास जीतने के बाद गहनों का गबन करना चाहता था। इसके लिए उसने अपने मित्र मनोज जोगदंड की मदद से दुर्घटना और चोरी की झूठी कहानी तैयार की तथा पुलिस को गुमराह करने के उद्देश्य से अस्पताल में भर्ती होने का सहारा लिया।पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 60 लाख 65 हजार 656 रुपये मूल्य की पूरी संपत्ति बरामद कर ली है। इस कार्रवाई से गोल्डस्टार ज्वेलरी कंपनी को बड़ी राहत मिली है। यह सफलता मुंबई पुलिस आयुक्त देवेन भारती, विशेष पुलिस आयुक्त डॉ. मनोजकुमार शर्मा, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त डॉ. अभिनव देशमुख, पुलिस उपायुक्त दत्ता नलावडे तथा सहायक पुलिस आयुक्त गजानन पवार के मार्गदर्शन में प्राप्त हुई।वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक रविंद्र वाणी, पुलिस निरीक्षक (अपराध) महेश गुरव, उपनिरीक्षक किरण परबत तथा उनकी टीम ने इस जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पुलिस की सूक्ष्म जांच, तकनीकी साक्ष्यों के प्रभावी उपयोग और त्वरित कार्रवाई के कारण कुछ ही दिनों में पूरे मामले का खुलासा हो गया और शत-प्रतिशत संपत्ति बरामद कर ली गई।इस कार्रवाई की पुलिस विभाग और व्यापारिक समुदाय में व्यापक सराहना हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी सफल रिकवरी और अपराध नियंत्रण में उल्लेखनीय भूमिका निभाने वाले पुलिसकर्मियों को प्रोत्साहन और विशेष पुरस्कार दिए जाने की व्यवस्था पर भी गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए, जिससे उनका मनोबल और अधिक मजबूत हो सके।



