
मुंबई। महाराष्ट्र में कक्षा 6 से 8 तक पढ़ाने वाले विषय शिक्षकों को स्नातक (ग्रेजुएट) वेतनमान देने का प्रस्ताव फिलहाल विधि एवं न्याय विभाग तथा वित्त विभाग के विचाराधीन है। दोनों विभागों की राय मिलने के बाद राज्य सरकार इस संबंध में उचित निर्णय लेगी। यह जानकारी मंत्री दादाजी भुसे ने विधान परिषद में दी। मंगलवार को विधान परिषद सदस्य सुधाकर अडबाले द्वारा प्रस्तुत ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का उत्तर देते हुए मंत्री भुसे ने कहा कि इस विषय पर सदन में सदस्यों अभिजीत वंजारी, अरुण लाड और जगन्नाथ अभ्यंकर ने भी चर्चा में भाग लिया। मंत्री भुसे ने बताया कि 14 नवंबर 1979 के शासन निर्णय के अनुसार प्राथमिक विद्यालयों से संबद्ध कक्षा 5 से 7 तक के स्कूलों में यदि चार या उससे अधिक योग्य शिक्षक हों, तो स्वीकृत पदों में से 25 प्रतिशत पदों को प्रशिक्षित स्नातक शिक्षकों के उच्च वेतनमान में परिवर्तित करने की अनुमति दी गई थी। इसके बाद 13 अक्टूबर 2016 के शासन परिपत्र के अनुसार उच्च प्राथमिक स्तर पर विज्ञान, भाषा और सामाजिक विज्ञान विषयों के लिए कम से कम एक प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक की नियुक्ति, विषयवार वरिष्ठता सूची तैयार करना तथा कक्षा 6 से 8 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों में से एक-तिहाई शिक्षकों को सेवा वरिष्ठता के आधार पर स्नातक वेतनमान देने का प्रावधान किया गया। साथ ही 1979 के शासन निर्णय के तहत पहले से स्नातक वेतनमान प्राप्त कर रहे शिक्षकों का वेतन संरक्षण भी जारी रखा गया है। उन्होंने बताया कि 8 मई 2026 को मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने अपने आदेश में संबंधित जिला परिषदों को निर्देश दिया है कि पात्र शिक्षकों को उनकी नियुक्ति अथवा पात्रता की तिथि से स्नातक वेतनमान का लाभ आठ सप्ताह के भीतर प्रदान किया जाए। मंत्री दादाजी भुसे ने कहा कि न्यायालय के इस आदेश के कानूनी और वित्तीय प्रभावों को ध्यान में रखते हुए संबंधित प्रस्ताव विधि एवं न्याय विभाग तथा वित्त विभाग को भेजा गया है। दोनों विभागों की राय प्राप्त होने के बाद राज्य सरकार इस विषय पर आवश्यक निर्णय लेकर आगे की कार्रवाई करेगी।



