सेंट्रल मार्केट से पूरे मेरठ तक पहुंची कार्रवाई, 16,726 अवैध निर्माण सील करने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख- पुराना होने से अवैध निर्माण वैध नहीं हो जाता; जोन B, C और D की भी मांगी रिपोर्ट, अगली सुनवाई 9 दिसंबर

मेरठ। शास्त्रीनगर के सेंट्रल मार्केट से शुरू हुआ अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई का मामला अब पूरे मेरठ शहर पर असर डाल सकता है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान मेरठ विकास प्राधिकरण की ओर से जोन-A की सर्वे रिपोर्ट पेश की गई, जिसमें 16,726 अनधिकृत व्यावसायिक निर्माण चिह्नित किए जाने की जानकारी दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने इन निर्माणों को सील करने के निर्देश दिए हैं। जोन-A में बेगमपुल, लिसाड़ी गेट, ब्रह्मपुरी, भगवतपुरा और तारापुरी समेत शहर के कई इलाके आते हैं। अदालत ने अन्य जोनों में भी ऐसी संपत्तियों को चिह्नित करने और कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने अवैध निर्माण के मामले में सख्त रुख अपनाया। सुनवाई की प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी निर्माण का वर्षों पुराना होना उसे वैध नहीं बना देता और अनधिकृत निर्माण के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करनी होगी।
जोन B, C और D पर भी नजर
सुनवाई के दौरान जोन-A की रिपोर्ट पेश की गई, लेकिन शहर के बाकी जोन B, C और D की विस्तृत रिपोर्ट उपलब्ध नहीं होने पर अदालत ने इस पर सवाल उठाए। अब इन क्षेत्रों में मौजूद अनधिकृत निर्माण और उनके खिलाफ की गई कार्रवाई का विवरण भी अदालत के सामने रखा जाना है। मामले की अगली सुनवाई 9 दिसंबर को निर्धारित की गई है। तब तक संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई और अनुपालन की रिपोर्ट पेश करनी होगी।
सेंट्रल मार्केट के 44 भवनों पर भी कार्रवाई
शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट के 44 भवनों को लेकर भी अदालत में अनुपालन रिपोर्ट पेश की गई। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 14 जुलाई के आदेश में इन संपत्तियों के अवैध व्यावसायिक निर्माण पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। हाल में इनमें से छह संपत्तियों पर बुलडोजर कार्रवाई भी की गई थी। अदालत ने पहले भी साफ किया था कि अवैध निर्माण को केवल कंपाउंडिंग के जरिए वैध करने का संदेश नहीं जाना चाहिए और अनधिकृत निर्माण के खिलाफ समय पर कार्रवाई जरूरी है।
सेटबैक में निर्माण वाली संपत्तियों पर भी कार्रवाई
आवास एवं विकास परिषद की ओर से सेटबैक में किए गए अनधिकृत निर्माणों के खिलाफ चल रही कार्रवाई की जानकारी भी अदालत को दी गई। कोर्ट ने संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों को कार्रवाई की निगरानी करने और अगली सुनवाई तक विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए। सुप्रीम कोर्ट का रुख साफ होने के बाद मामला अब केवल शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट के कुछ भवनों तक सीमित नहीं दिख रहा है। जोन-A के हजारों निर्माणों पर सीलिंग के आदेश और बाकी तीन जोनों में अनधिकृत निर्माणों की पहचान के निर्देश के बाद शहर के दूसरे हिस्सों में भी कार्रवाई का दायरा बढ़ सकता है। ईडब्ल्यूएस और एलआईजी आवासों से जुड़े प्रभावित लोगों के पुनर्वास के मुद्दे पर भी राज्य सरकार की ओर से नीति तैयार किए जाने की जानकारी अदालत को दी गई है।

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