जालना में जलसंकट की आशंका, अगस्त तक का पानी प्लान तैयार करने के निर्देश

मंत्री पंकजा मुंडे ने सभी जलस्रोतों का तत्काल ऑडिट करने को कहा, हर टैंकर में लगेगा GPS, पशुओं के पानी और चारे के लिए बनेगा अलग एक्शन प्लान

मुंबई। जालना जिले में संभावित जलसंकट को देखते हुए पालकमंत्री एवं पर्यावरण तथा पशुसंवर्धन मंत्री पंकजा मुंडे ने प्रशासन को सभी जलस्रोतों की मौजूदा स्थिति, उपलब्ध जल भंडार और संभावित उपयोग का तत्काल ऑडिट कर अगले अगस्त तक का जलापूर्ति प्लान तैयार करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने नागरिकों के साथ पशुधन के लिए पानी और चारे की उपलब्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने को कहा है। सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जालना जिले में पानी और चारे की स्थिति की समीक्षा करते हुए मुंडे ने बांधों, तालाबों, कुओं, लघु सिंचाई परियोजनाओं और अन्य प्राकृतिक जलस्रोतों में उपलब्ध पानी का ऑडिट अगली बैठक से पहले पूरा करने के निर्देश जिलाधिकारी आशिमा मित्तल को दिए। उन्होंने जायकवाड़ी परियोजना से होने वाली लिफ्ट जलापूर्ति तथा अंबड और जालना शहर को उपलब्ध कराए जा सकने वाले पानी की अवधि का सटीक आकलन करने को कहा। मौजूदा जल भंडार मार्च तक पर्याप्त रहने की संभावना जताई गई है, लेकिन अगली बारिश तक पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं होने की स्थिति को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था अभी से तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
शहर से पहाड़ी गांवों तक चिह्नित होंगे जलस्रोत
मुंडे ने महानगरपालिका, नगर पंचायतों, बड़ी ग्राम पंचायतों के साथ दुर्गम और पहाड़ी गांवों के लिए पेयजल स्रोत अभी से चिह्नित करने को कहा। इन स्रोतों के जलस्तर की नियमित निगरानी करने और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक स्रोत तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं। उपलब्ध पानी का किफायती इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए कृषि, उद्योग, बड़े निर्माण कार्यों और अधिक पानी की खपत वाले अन्य क्षेत्रों की समीक्षा कर आवश्यक उपायों का प्रस्ताव तैयार करने को भी कहा गया है।
टैंकरों पर GPS से रखी जाएगी नजर
टैंकर से होने वाली जलापूर्ति में पारदर्शिता और निगरानी बढ़ाने के लिए तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। पंकजा मुंडे ने प्रत्येक पानी के टैंकर को GPS प्रणाली से जोड़ने के निर्देश दिए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि पानी वास्तव में जरूरतमंद गांवों और नागरिकों तक पहुंच रहा है।
पशुओं के चारे के लिए अलग एक्शन प्लान
जिले में पशुधन की संख्या, मौजूदा चारा भंडार और संभावित कमी का आकलन कर अलग चारा कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया है। प्रशासन यह भी तय करेगा कि किन क्षेत्रों में चारा डिपो अथवा चारा शिविरों की जरूरत पड़ सकती है और अतिरिक्त चारा कहां से उपलब्ध कराया जा सकता है। पड़ोसी जिलों के जिलाधिकारियों से समन्वय कर वहां चारे की उपलब्धता की जानकारी लेने तथा पानी उपलब्ध होने वाले क्षेत्रों में किसानों को चारा फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। गादयुक्त क्षेत्रों का इस्तेमाल चारा उत्पादन के लिए किया जा सकता है या नहीं, इसकी भी व्यवहार्यता जांची जाएगी।
यदि चारा शिविर अथवा अन्य उपायों के लिए राज्य स्तर पर निर्णय या अतिरिक्त धनराशि की जरूरत पड़ती है तो तत्काल सरकार को प्रस्ताव भेजने को कहा गया है।
28 अक्टूबर को फिर होगी समीक्षा
पेयजल, पशुधन के लिए पानी और चारे की स्थिति पर केंद्रित विशेष बैठक 28 अक्टूबर को आयोजित की जाएगी। इससे पहले जलस्रोतों का ऑडिट, संभावित जलसंकट वाले गांवों की सूची, चारा नियोजन और आवश्यक उपायों की विस्तृत जानकारी तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं। जिलाधिकारी आशिमा मित्तल ने कहा कि संभावित सूखे जैसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए सभी जलस्रोतों की उपलब्धता और मौजूदा स्थिति का विवरण जुटाया जाएगा। तहसील स्तर पर भी बैठकें कर संभावित संकट से निपटने की अग्रिम तैयारी की जाएगी। उन्होंने फसल बीमा के लिए महत्वपूर्ण फसल कटाई प्रयोगों को गंभीरता और सटीकता से पूरा करने के भी निर्देश दिए, ताकि पात्र किसानों को फसल बीमा का लाभ मिलने में परेशानी न हो। बैठक में जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. कृष्ण कांत कनवारिया, अपर जिलाधिकारी रमेश मिसाल, निवासी उपजिलाधिकारी शशिकांत हदगल सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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