
आसनसोल (पश्चिम बंगाल)| आगामी विधानसभा चुनावों से पहले पश्चिम बंगाल की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। इसी कड़ी में कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने मंगलवार को राज्य की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार और केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सरकार पर विकास को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। आसनसोल में मीडिया से बातचीत करते हुए पायलट ने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता ने राज्य और केंद्र—दोनों सरकारों को कई बार अवसर दिया, लेकिन इसके बावजूद अपेक्षित विकास नहीं हो सका। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 10-12 वर्षों में राज्य में जिस स्तर का विकास होना चाहिए था, वह नहीं हुआ। पायलट ने कहा, “बंगाल की जनता बदलाव चाहती है, क्योंकि उन्होंने मौजूदा राज्य सरकार और केंद्र सरकार—दोनों को कई मौके दिए हैं। इसके बावजूद विकास धरातल पर नजर नहीं आया। जो विकास केंद्र सरकार के सहयोग से होना चाहिए था, वह भी नहीं हो सका।” उन्होंने यह भी कहा कि राज्य और केंद्र सरकार के बीच लगातार टकराव का सीधा असर आम जनता पर पड़ा है। “इस राजनीतिक संघर्ष का खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है। विकास कार्य प्रभावित हुए हैं और जनता की अपेक्षाएं अधूरी रह गई हैं,” पायलट ने जोड़ा। कांग्रेस की चुनावी रणनीति पर बात करते हुए पायलट ने बताया कि इस बार पार्टी पश्चिम बंगाल की सभी सीटों पर चुनाव लड़ रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस राज्य के विकास के लिए “पांच गारंटी” लेकर जनता के बीच जा रही है और उसे अच्छा समर्थन मिल रहा है। पायलट ने यह भी जानकारी दी कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी आगामी चरणों में पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार करेंगे, जिससे पार्टी को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के उम्मीदवार मजबूत हैं और पार्टी इस बार प्रभावी तरीके से चुनाव लड़ रही है। “पहली बार कांग्रेस पश्चिम बंगाल की सभी सीटों पर चुनाव लड़ रही है। हमारी जड़ें हमेशा मजबूत रही हैं, भले ही हम लंबे समय से सत्ता से बाहर रहे हों। इस बार हम पूरी ताकत के साथ मैदान में हैं और जीत के लिए संघर्ष कर रहे हैं,” पायलट ने कहा। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए प्रचार मंगलवार को समाप्त हो गया। इस चरण में 23 अप्रैल को 152 सीटों पर मतदान होगा, जिसमें 1,478 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला होगा। चुनावी मैदान में टीएमसी और बीजेपी के बीच तीखी टक्कर देखने को मिल रही है, जबकि कांग्रेस और वाम दल इस बार अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस चुनाव में विकास, बेरोजगारी, और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे, वहीं केंद्र और राज्य सरकार के बीच टकराव भी चुनावी बहस का अहम हिस्सा बना हुआ है।




