
बाल विवाह, बाल मजदूरी, बुलिंग और यौन शोषण जैसे गंभीर विषय भी सरल भाषा में शामिल
मुंबई। बच्चों को उनके संवैधानिक और कानूनी अधिकारों की जानकारी अब रोचक और आनंददायक तरीके से मिलेगी। रविवार को न्याय संस्था और विधि सेंटर फॉर लीगल पॉलिसी की ओर से तैयार की गई ‘हर बच्चे को जानने चाहिए 18 मौलिक अधिकार’ कलरिंग बुक का विमोचन महाराष्ट्र की महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे के हाथों किया गया। यह कलरिंग बुक बच्चों को नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। मुंबई के नेशनल सेंटर फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स (NCPA) में आयोजित कार्यक्रम में बॉम्बे हाई कोर्ट की न्यायमूर्ति भारती डांगरे, पूर्व न्यायमूर्ति आर. सी. चव्हाण, अनीशा गोपी सहित विभिन्न क्षेत्रों की कई हस्तियां उपस्थित रहीं। इस अवसर पर संस्था की ओर से महाराष्ट्र में ‘संविधान फेलोशिप’ की भी शुरुआत की गई। बच्चों को छोटी उम्र से ही अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनाने के उद्देश्य से तैयार इस कलरिंग बुक में उनके 18 महत्वपूर्ण अधिकारों को सरल और समझने योग्य तरीके से प्रस्तुत किया गया है। इसमें आश्रय, पोषण, शिक्षा और मुफ्त कानूनी सहायता जैसे बुनियादी अधिकारों की जानकारी दी गई है। खास बात यह है कि पुस्तक में केवल अधिकारों की जानकारी ही नहीं, बल्कि बच्चों से जुड़े गंभीर सामाजिक मुद्दों को भी संवेदनशील तरीके से समझाने का प्रयास किया गया है। बाल विवाह, बाल मजदूरी, रैगिंग, बुलिंग और यौन शोषण जैसे विषयों को बच्चों की उम्र और समझ को ध्यान में रखते हुए शामिल किया गया है। महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने कहा कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए राज्य सरकार हमेशा प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि इस अभिनव कलरिंग बुक के माध्यम से बच्चों को अपने अधिकारों के बारे में सरल और आनंददायक तरीके से जानकारी मिलेगी। रंग भरने जैसी गतिविधि के साथ उनके मन में अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता विकसित होना इस पहल की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है। तटकरे ने संविधान फेलोशिप की शुरुआत का भी स्वागत करते हुए कहा कि कानून और संविधान के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाने के लिए संस्था द्वारा उठाया गया यह कदम महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम के दौरान धारावी ड्रीम प्रोजेक्ट की ओर से विशेष प्रस्तुति दी गई। इसके साथ ही बच्चों के अधिकारों पर तैयार किए गए एक रैप गीत का भी लोकार्पण किया गया। आयोजकों के अनुसार, इस पूरी पहल का उद्देश्य बच्चों को उनके अधिकारों की जानकारी किताबों की जटिल कानूनी भाषा के बजाय ऐसी शैली में देना है, जिसे वे आसानी से समझ सकें और अपने दैनिक जीवन से जोड़ सकें।

