बच्चों को समय पर मिले ताजा, पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण भोजन: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस

मुंबई। महाराष्ट्र में प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के तहत विद्यार्थियों को समय पर ताजा, पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने का अधिकार जिला स्तर पर देने के निर्देश मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दिए हैं। साथ ही वर्तमान में पहली से आठवीं कक्षा तक मिलने वाले पोषण आहार का लाभ दसवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को देने की व्यवहार्यता जांचकर प्रस्ताव पेश करने को कहा गया है। सोमवार को सह्याद्री अतिथि गृह में प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना की समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने स्कूल शिक्षा और महिला एवं बाल विकास विभाग को संयुक्त नीति तैयार कर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने को कहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरी क्षेत्रों के साथ ग्रामीण इलाकों में भी जहां व्यावहारिक हो, वहां केंद्रीय रसोईघर का विकल्प अपनाया जाए। लेकिन दुर्गम और आदिवासी क्षेत्रों में भोजन पहुंचने में देरी होती है तो ग्राम पंचायतों के माध्यम से स्थानीय विकल्प अपनाए जाएं। जहां संभव हो, भोजन वितरण की जिम्मेदारी स्थानीय बचत समूहों को दी जाए तथा भोजन की गुणवत्ता, सेवा और भुगतान व्यवस्था के लिए स्पष्ट मानदंड तय किए जाएं। उन्होंने जिलाधिकारियों और जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को स्थानीय जरूरतों तथा उपलब्ध संसाधनों के आधार पर निर्णय लेने को कहा। जिला स्तरीय पोषण आहार समिति के माध्यम से भोजन में स्थानीय प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ, मिलेट से बने व्यंजन और अधिक पोषण मूल्य वाले विकल्प शामिल करने की योजना बनाने के भी निर्देश दिए गए। स्कूल शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे ने केंद्रीय रसोईघरों का दायरा बढ़ाने के साथ ग्राम पंचायतों को धन उपलब्ध कराकर स्थानीय स्तर पर पोषण आहार की व्यवस्था करने का सुझाव दिया। उन्होंने चावल की मात्रा कम कर दूसरे अनाजों का इस्तेमाल बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार से मांग करने की भी बात कही। महिला एवं बाल विकास मंत्री आदिती तटकरे ने बताया कि शहरी क्षेत्रों की 30 आंगनवाड़ियों में ‘इस्कॉन’ के माध्यम से पोषण आहार उपलब्ध कराया जा रहा है। इसकी प्रभावशीलता की समीक्षा के बाद इसका दायरा बढ़ाया जाएगा। उन्होंने प्रीमिक्स या फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थों की बजाय स्थानीय जरूरतों के अनुसार ताजा भोजन को प्राथमिकता देने का सुझाव दिया। मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल ने पोषण आहार में मैदे के इस्तेमाल से बचने की बात कही। वर्तमान में महाराष्ट्र की 85,206 पात्र स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना का लाभ दिया जा रहा है। केंद्र सरकार के मानकों के अनुसार विद्यार्थियों को कैलोरी और प्रोटीन युक्त दोपहर का भोजन दिया जाता है। भोजन में विविधता के लिए पुलाव, खिचड़ी, उसल और दाल-चावल सहित विभिन्न व्यंजनों को शामिल किया गया है। बैठक में राज्यमंत्री मेघना साकोरे-बोर्डीकर सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
