
एफडीए और व्यापारियों की बनेगी संयुक्त समिति; पैकेजिंग व गुणवत्ता जांच व्यवस्था के लिए सरकार दे सकती है सहायता और सब्सिडी
मुंबई। महाराष्ट्र में खुले खाद्य तेल की बिक्री करने वाले व्यापारियों को राज्य सरकार ने बड़ी राहत दी है। मौजूदा कानून के अनुरूप अपनी कारोबारी व्यवस्था में बदलाव करने के लिए व्यापारियों को एक वर्ष का संक्रमण काल दिया जाएगा। इस अवधि के दौरान खुले खाद्य तेल की बिक्री को लेकर की जाने वाली कार्रवाई भी फिलहाल स्थगित रहेगी। हालांकि, एक साल बाद समय सीमा नहीं बढ़ाई जाएगी और व्यापारियों को संबंधित कानून का अनिवार्य रूप से पालन करना होगा। मंगलवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में मंत्रालय में खुले खाद्य तेल की बिक्री से जुड़े मुद्दों को लेकर हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यापारियों को नई व्यवस्था अपनाने में आने वाली कठिनाइयों का समाधान निकालने के लिए खाद्य एवं औषध प्रशासन (एफडीए) और व्यापारी प्रतिनिधियों की संयुक्त समिति गठित की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर कारोबारियों को सरकार की ओर से सुविधाएं, आर्थिक सहायता, अनुदान अथवा सब्सिडी उपलब्ध कराने पर भी विचार किया जाएगा।मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि खुले खाद्य तेल की बिक्री के खिलाफ कार्रवाई का क्रियान्वयन फिलहाल एक वर्ष के लिए स्थगित किया जाएगा। इसके बाद अवधि बढ़ाना संभव नहीं होगा और कानून का पालन करना ही पड़ेगा। इसलिए इस एक वर्ष में प्रत्येक कारोबारी को अपनी व्यवसाय पद्धति में कानून के अनुरूप आवश्यक बदलाव करने होंगे।उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी खुले खाद्य तेल की मांग है और बड़ी संख्या में लोगों का रोजगार इस व्यवसाय से जुड़ा हुआ है। महाराष्ट्र में वर्षों से पारंपरिक तरीके से खुले तेल की बिक्री होती रही है। ऐसे में अचानक पूरी व्यवस्था बदलने के बजाय व्यापारियों को नई व्यवस्था अपनाने के लिए पर्याप्त समय देना जरूरी है। कानून और आम नागरिकों की जरूरतों के बीच संतुलित रास्ता निकालने का प्रयास किया जाएगा।सरकार खाद्य तेल विक्रेताओं, उत्पादकों और री-पैकिंग कारोबारियों के लिए भी कानून के अनुरूप व्यवस्था विकसित करने की योजना बनाएगी। गुणवत्ता जांच, पैकेजिंग और अन्य जरूरी बुनियादी सुविधाएं तैयार करने में कारोबारियों को सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। एक महीने में रिपोर्ट देंगी दो समितियांखुले खाद्य तेल के कारोबार से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए सरकार दो समितियां गठित करेगी। पहली समिति पारंपरिक तरीके से कारोबार करने वाले व्यापारियों की समस्याओं का अध्ययन कर उन्हें कानून के अनुरूप बदलाव करने के उपाय सुझाएगी। दूसरी समिति खाद्य तेल विक्रेताओं, उत्पादकों, री-पैकिंग कारोबारियों और अन्य संबंधित पक्षों के लिए जरूरी सुविधाओं और व्यवस्था को लेकर सुझाव देगी।मुख्यमंत्री ने दोनों समितियों को संबंधित पक्षों से चर्चा और समन्वय कर एक महीने के भीतर राज्य सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। फडणवीस ने कहा कि सरकार किसी कारोबारी को व्यवसाय से वंचित नहीं करना चाहती। कानून का पालन सुनिश्चित करने के साथ व्यापारियों को सुरक्षित और बेहतर तरीके से अपना कारोबार जारी रखने के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा।महाराष्ट्र में 2,103 खुले खाद्य तेल कारोबारी लाइसेंसधारक खाद्य तेल में मिलावट और उससे नागरिकों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने वर्ष 2011 में इससे संबंधित कानूनी प्रावधान लागू किए थे। खुले खाद्य तेल की बिक्री को लेकर कड़े नियमन के निर्देश भी दिए गए हैं। इसके नियमन के लिए 28 अगस्त 2020 तक चार बार अधिसूचनाएं जारी की जा चुकी हैं। राज्य में वर्तमान में खुले खाद्य तेल का कारोबार करने वाले 2,103 लाइसेंसधारक हैं। इनमें 370 कारोबारियों को खाद्य तेल की री-पैकिंग कर बिक्री करने का लाइसेंस दिया गया है, जबकि 489 कारोबारियों के पास खाद्य तेल उत्पादन का लाइसेंस है। बैठक में उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार, मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे, खाद्य एवं औषध प्रशासन मंत्री नरहरी झिरवाल सहित मंत्रिमंडल के अन्य सदस्य और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

