नए नियम पर ट्रांसपोर्टरों में नाराजगी, डॉ. बाबा शिंदे ने दी जनआंदोलन की चेतावनी

इंद्र यादव/मुंबई। महाराष्ट्र में वाहन चालकों और ट्रांसपोर्टरों के लिए 1 सितंबर 2026 से लागू नए नियम ने नाराजगी बढ़ा दी है। केंद्र सरकार के 20 जनवरी 2026 के निर्देशों के आधार पर ठाणे प्रादेशिक परिवहन कार्यालय (आरटीओ) ने स्पष्ट किया है कि वाहन से संबंधित विभिन्न सेवाओं का लाभ लेने से पहले लंबित ई-चालान और न्यायालय में लंबित यातायात मामलों से जुड़ी दंड राशि का भुगतान करना होगा।नए निर्देश के मुताबिक वाहन का फिटनेस प्रमाणपत्र, परमिट से जुड़े कार्य, स्वामित्व हस्तांतरण, हाइपोथिकेशन यानी वाहन ऋण से संबंधित प्रक्रिया सहित आरटीओ की विभिन्न सेवाओं के दौरान संबंधित वाहन पर लंबित ई-चालान की जांच की जाएगी। बकाया दंड राशि का भुगतान नहीं होने की स्थिति में वाहन से संबंधित प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ने से वाहन मालिकों की परेशानी बढ़ सकती है। इस फैसले को लेकर ट्रांसपोर्टरों और वाहन चालकों में नाराजगी देखने को मिल रही है। उनका कहना है कि पिछले दो-तीन वर्षों से बड़ी संख्या में वाहन चालक कथित रूप से गलत अथवा विवादित ई-चालान की शिकायत करते रहे हैं। कई वाहन मालिकों का दावा है कि ऐसे चालान भी उनके वाहनों के नाम पर दर्ज हैं, जिन्हें वे गलत मानते हैं और जिनके निस्तारण की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। ऐसे में सभी लंबित चालानों के भुगतान को आरटीओ सेवाओं से जोड़ना उनके लिए परेशानी का कारण बन सकता है।महाराष्ट्र राज्य माल व प्रवासी वाहतूक संगठन के अध्यक्ष डॉ. बाबा शिंदे ने इस निर्णय का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने कहा कि वाहन चालकों को पहले से ही गलत ई-चालान की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। सरकार की ओर से पूर्व में गलत चालानों के समाधान और राहत की बात कही गई थी, लेकिन अब बकाया चालान को आरटीओ के कामकाज से जोड़ने के कारण वाहन मालिकों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।डॉ. शिंदे का कहना है कि यदि किसी वाहन चालक का चालान गलत है अथवा वह उसे चुनौती दे रहा है, तो उसका उचित निस्तारण किए बिना वाहन से संबंधित दूसरी आवश्यक सेवाओं को रोकना न्यायसंगत नहीं है। सरकार को पहले गलत और विवादित ई-चालानों के निपटारे के लिए पारदर्शी एवं समयबद्ध व्यवस्था करनी चाहिए। संगठन ने चेतावनी दी है कि नए निर्देश को लेकर सरकार ने वाहन चालकों और ट्रांसपोर्टरों की समस्याओं का समाधान नहीं किया तो राज्य स्तर पर आंदोलन किया जाएगा। इसके लिए ट्रांसपोर्ट संगठनों और वाहन चालकों को एकजुट करने की तैयारी की जा रही है।ई-चालान व्यवस्था का उद्देश्य यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित करना और सड़क सुरक्षा को मजबूत करना है, लेकिन नए निर्देश के बाद अब सबसे बड़ा सवाल उन वाहन मालिकों को लेकर उठ रहा है, जिनके चालान विवादित हैं या जिन्हें वे गलत बताते हुए पहले से शिकायत कर चुके हैं। ऐसे मामलों के निस्तारण की प्रभावी व्यवस्था किए बिना आरटीओ सेवाएं रोकने के निर्णय को लेकर आने वाले दिनों में सरकार और ट्रांसपोर्ट संगठनों के बीच टकराव बढ़ सकता है।

