विशेष लेख

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विजयादशमी: विजय के पर्व में विदाई की संवेदना

कुमार कृष्णनभारत की सांस्कृतिक विविधता का सबसे सुंदर रूप उसके त्योहारों में दिखाई देता है। एक ही पर्व अलग-अलग क्षेत्रों

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मध्यप्रदेशविशेष लेख

पुरुष नहीं, समय होत बलवान… बदल गया शिवराज सिंह चौहान का वक़्त

पवन वर्माएक सुप्रसिद्ध कहावत है- पुरुष बलि नहीं होत है समय होत बलवान। भीलन लूटी गोपिका वे ही अर्जुन वे

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Politicsराजनीतिविशेष लेख

सत्ता परिवर्तन का रास्ता भीड़तंत्र नहीं, जनमत -लोकतंत्र से

सौरभ वार्ष्णेयभारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र ही नहीं, बल्कि विविधताओं, सहिष्णुता, शांति और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए पहचाना जाने

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मध्यप्रदेशविशेष लेख

बालाघाट का दशहरा: जब साकार होते हैं श्रीराम और महावीर

“तपस्या से मुकुट तक, सात दशक से अधिक पुरानी परंपरा आज भी जीवित” हेमेन्द्र क्षीरसागरमां दुर्गा और प्रभु श्रीराम की

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विशेष लेख

लोकतांत्रिक विरोध और जनजीवन की दुश्वारियाँ

महेन्द्र तिवारीदिल्ली का कनॉट प्लेस केवल एक व्यावसायिक केंद्र नहीं, बल्कि राजधानी की सामाजिक, सांस्कृतिक और पर्यटन संबंधी गतिविधियों का

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राजनीतिविशेष लेख

नशामुक्त उत्तराखंड की दिशा में गुटखा-तंबाकू प्रतिबंध जरूरी

सौरभ वार्ष्णेययुवाओं का स्वास्थ्य, प्रशासन की जवाबदेही और प्रतिबंध के प्रभावी क्रियान्वयन से ही साकार होगा। स्वस्थ देवभूमि का संकल्प

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राजनीतिविशेष लेख

सुकुमार सेन के दौर से एसआईआर तक: बदलती प्राथमिकताएं और बढ़ती चुनौतियां

रविशंकर कुमार चौधरीभारत के चुनावी इतिहास में दो तस्वीरें हमारे लोकतंत्र की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। पहली

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