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बॉम्बे हाई कोर्ट की FDA को फटकार, 100% नियमों का पालन करने के बावजूद रेस्टोरेंट का लाइसेंस बहाल न करने पर उठाए सवाल

मुंबई। बॉम्बे हाई कोर्ट ने सोमवार को नवी मुंबई के सीबीडी बेलापुर स्थित ‘पवन बार एंड रेस्टोरेंट’ के FSSAI लाइसेंस के निलंबन (सस्पेंशन) को रद्द करते हुए महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने पाया कि दोबारा निरीक्षण में रेस्टोरेंट को 100 प्रतिशत नियमों का पालन करने वाला घोषित किए जाने के बावजूद उसका लाइसेंस बहाल नहीं किया गया, जिससे होटल को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र वी. घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखाड की खंडपीठ ने FDA को रेस्टोरेंट का पुनः निरीक्षण करने का निर्देश दिया। साथ ही होटल प्रबंधन से 14 जुलाई के बाद हुए आर्थिक नुकसान का विस्तृत ब्योरा भी मांगा। अदालत ने संकेत दिया कि यदि लाइसेंस बहाल करने में अनावश्यक देरी साबित होती है, तो FDA को होटल को हुए नुकसान की भरपाई (मुआवजा) देने का निर्देश भी दिया जा सकता है। मामले की शुरुआत 29 जून को FDA द्वारा की गई अचानक जांच से हुई थी। निरीक्षण में रेस्टोरेंट को खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुपालन में 69 प्रतिशत अंक मिले थे। इसके अगले दिन FDA ने FSSAI लाइसेंस निलंबित कर होटल को खाद्य कारोबार बंद करने का आदेश दे दिया। जांच के दौरान यह भी पाया गया कि रेस्टोरेंट का कच्चा माल रखने वाला गोदाम आवश्यक लाइसेंस के बिना संचालित हो रहा था। रेस्टोरेंट प्रबंधन ने हाई कोर्ट को बताया कि FDA द्वारा बताई गई सभी कमियों को तत्काल दूर कर दिया गया था। इसके बाद 14 जुलाई को हुई दोबारा जांच में अधिकारियों ने होटल को 100 प्रतिशत अनुपालन वाला घोषित किया और प्रमाणित किया कि सभी खामियां दूर कर दी गई हैं। इसके बावजूद लाइसेंस बहाल नहीं किया गया, जिससे होटल का संचालन बंद रहा और व्यवसाय के साथ-साथ कर्मचारियों को भी भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता मयूर खांडेपारकर, अधिवक्ता शुभ्रा स्वामी और सागर शेट्टी ने अदालत को बताया कि खाद्य लाइसेंस निलंबित रहने के कारण होटल का शराब परोसने का लाइसेंस भी स्वतः प्रभावित हो गया, क्योंकि वह FSSAI लाइसेंस से जुड़ा हुआ था।
खंडपीठ ने टिप्पणी की कि जब संबंधित अधिकारी स्वयं यह प्रमाणित कर चुके थे कि रेस्टोरेंट सभी मानकों का पालन कर रहा है, तब लाइसेंस तत्काल बहाल किया जाना चाहिए था। अदालत ने यह भी पूछा कि यदि FDA अपनी ही निरीक्षण रिपोर्ट के अनुरूप कार्रवाई करने में विफल रहा, तो 14 जुलाई के बाद हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई कौन करेगा। सरकारी पक्ष ने अदालत को बताया कि लाइसेंस निलंबन के खिलाफ होटल द्वारा दायर अपील अभी भी संबंधित प्राधिकारी के समक्ष लंबित है। इस पर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश घुगे ने कहा कि भले ही आयुक्त तुकाराम मुंडे के नेतृत्व में FDA ने हाल के समय में अपनी कार्रवाई तेज की हो, लेकिन किसी भी स्थिति में ऐसे मामले में हुए संभावित अन्याय को अदालत नजरअंदाज नहीं कर सकती। मामले की आगे की सुनवाई में अदालत FDA की कार्रवाई, निरीक्षण रिपोर्ट और होटल को हुए आर्थिक नुकसान के पहलुओं पर विस्तार से विचार करेगी।

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