
मुंबई। बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुधवार को महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख की याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को नोटिस जारी किया है। देशमुख ने अपने खिलाफ दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोप तय करने की प्रक्रिया पर अस्थायी रोक लगाने की मांग की है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एकल पीठ के न्यायमूर्ति अश्विन भोबे ने ईडी को याचिका पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। एजेंसी की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह पेश हुए। अदालत ने मामले की अगली विस्तृत सुनवाई के लिए 18 जून की तारीख तय की है। देशमुख की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विक्रम चौधरी ने दलील दी कि मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम के तहत कार्रवाई करने से पहले केंद्रीय जांच ब्यूरो द्वारा दर्ज भ्रष्टाचार के मामले का निपटारा होना जरूरी है, क्योंकि वही ‘मूल अपराध’ (प्रेडिकेट ऑफेंस) है। उन्होंने कहा कि सीबीआई ने तीन आरोपों के आधार पर जांच शुरू की थी, लेकिन अब तक केवल एक मामले में ही चार्जशीट दाखिल की है, जो बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाजे से जुड़ा है। वकील ने तर्क दिया कि यदि इस स्तर पर ईडी के मामले में आरोप तय हो जाते हैं, तो देशमुख ‘मूल अपराध’ में राहत पाने के अपने अधिकार से वंचित हो सकते हैं। उन्होंने विजय मदनलाल चौधरी बनाम भारत संघ के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि पीएमएलए के तहत कार्यवाही ‘मूल अपराध’ से जुड़ी होती है और उसके अंतिम निपटारे के बिना इसे अंतिम रूप नहीं दिया जा सकता। वहीं, ईडी की ओर से पेश एएसजी अनिल सिंह ने अंतरिम राहत का विरोध किया। हालांकि, अदालत ने कहा कि चूंकि याचिका में ट्रायल पर रोक की मांग की गई है, इसलिए इस पर विस्तृत सुनवाई आवश्यक है। ईडी के अनुसार, अनिल देशमुख ने दिसंबर 2020 से फरवरी 2021 के बीच सचिन वाजे के जरिए कथित तौर पर 4.7 करोड़ रुपये की अवैध वसूली की थी। देशमुख को नवंबर 2021 में गिरफ्तार किया गया था और बाद में 2022 में उन्हें ईडी और सीबीआई दोनों मामलों में जमानत मिल गई थी।




