
रघुलीला मेगामॉल में बने अवैध मेजेनाइन फ्लोर पर कब चलेगा हथौड़ा?
मुंबई। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएसमी) के आर/मध्य विभाग में अवैध निर्माणों को लेकर गंभीर आरोपों के बीच विभागीय कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। इसी बीच विभागीय कार्यकारी अभियंता व प्रभारी पदनिर्देशित अधिकारी (डीओ) महेश सिनकर आज, 30 मार्च 2026 को सेवानिवृत्त हो रहे हैं, जिससे पूरे मामले ने और तूल पकड़ लिया है। कांदिवली पश्चिम स्थित रघुलीला मेगामॉल में बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण और अतिक्रमण के मामले सामने आए हैं। जानकारी के अनुसार, मॉल के फर्स्ट और सेकंड फ्लोर पर स्थित कई दुकानों में गैरकानूनी तरीके से मेजेनाइन फ्लोर का निर्माण किया गया है। इन अवैध संरचनाओं को दुकानदार किराए पर देकर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। यह स्थिति न केवल भवन निर्माण नियमों और सुरक्षा मानकों की खुली अनदेखी को दर्शाती है, बल्कि भीड़भाड़ वाले इस व्यावसायिक परिसर में किसी बड़े हादसे की आशंका भी लगातार बढ़ा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अवैध मेजेनाइन फ्लोर आग या आपातकालीन स्थिति में निकासी को बेहद जोखिमपूर्ण बना सकते हैं। सूत्रों का आरोप है कि बीएमसी आर/मध्य विभाग के कनिष्ठ अभियंता और सहायक अभियंता कथित रूप से मासिक रिश्वत लेकर इन अवैध निर्माणों को संरक्षण दे रहे हैं। अक्सर देखा गया है कि कार्रवाई के नाम पर केवल नोटिस जारी किए जाते हैं, जो कई बार महज औपचारिकता बनकर रह जाते हैं या कथित वसूली का माध्यम बन जाते हैं। बता दे कि पिछले महीने महेश सिनकर ने रघुलीला मेगामॉल में बने अवैध मेजेनाइन फ्लोर पर कार्रवाई का आश्वासन दिया था। हालांकि, उनके कार्यकाल के अंत तक इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। अब पूरे मामले में निगाहें सहायक आयुक्त डॉ. प्रफुल दिनेश तांबे पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या नया प्रशासनिक नेतृत्व इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते हुए अवैध निर्माणों पर कार्रवाई करेगा, या फिर यह मामला भी फाइलों और कथित संरक्षण के जाल में दबकर रह जाएगा।




