हत्या के आरोपी ने रची अपनी मौत की साजिश, बकरे का अंतिम संस्कार कराकर 10 लाख का बीमा क्लेम किया

चिता पर लेटकर खिंचवाई तस्वीर, फिर बकरे का शव जलाकर मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाया

गाजीपुर, उत्तर प्रदेश। हत्या के एक मामले में आजीवन कारावास की सजा से बचने के लिए आरोपी राजकुमार राजभर ने अपनी मौत का ऐसा नाटक रचा, जिसमें चिता पर खुद लेटकर तस्वीर खिंचवाने से लेकर बकरे का अंतिम संस्कार कराने और तेरहवीं का भोज आयोजित करने तक की साजिश शामिल थी। पुलिस के अनुसार, इस फर्जी मौत के आधार पर उसकी पत्नी ने बीमा कंपनी से करीब 10 लाख रुपये का क्लेम भी हासिल कर लिया। मामले की जांच में दो होम्योपैथिक डॉक्टरों की भूमिका भी सामने आई है, जिनके पैसे शेयर बाजार और क्रिप्टो ट्रेडिंग में फंसे होने की बात कही जा रही है। शहर कोतवाल प्रमेश सिंह के मुताबिक, ख्वाजाहापुर निवासी राजू उर्फ राजकुमार राजभर (38) वर्ष 2016 में ईंट-भट्ठा संचालक योगेश सिंह की हत्या के मामले में आरोपी है। मुकदमे की सुनवाई अंतिम चरण में पहुंचने और आजीवन कारावास की सजा का डर सताने पर उसने खुद को कागजों में मृत घोषित कराने की योजना बनाई। हैरानी की बात यह है कि मृत घोषित होने के बाद भी वह पिछले 18 महीनों से जिले में ही रहकर शेयर बाजार और क्रिप्टो ट्रेडिंग का काम कर रहा था।
बकरे का अंतिम संस्कार कराकर मौत का नाटक
पुलिस की पूछताछ में सामने आए तथ्यों के अनुसार, राजकुमार ने पहले बेहोश होने का नाटक किया। इसके बाद परिजन उसे अस्पताल ले गए। पुलिस के मुताबिक, उसकी तस्वीरें तैयार की गईं और उन्हें संपादित कर इस तरह दिखाया गया, मानो श्मशान घाट पर उसका शव रखा हो। बाद में चिता पर बकरे का शव रखकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया, ताकि किसी को शक न हो। इसके बाद परिजनों ने उसकी तेरहवीं का भोज भी आयोजित किया। इसी कथित फर्जीवाड़े के आधार पर गाजीपुर से मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाया गया। फिर बीमा कंपनी से करीब 10 लाख रुपये का क्लेम हासिल कर लिया गया। पुलिस अब जांच कर रही है कि बीमा कंपनी को कौन-कौन से दस्तावेज सौंपे गए और इस पूरी साजिश में पत्नी की क्या भूमिका थी।
जांच के दायरे में दो होम्योपैथिक डॉक्टर
पुलिस के अनुसार, शेयर बाजार और क्रिप्टो ट्रेडिंग में दो होम्योपैथिक डॉक्टरों का पैसा भी फंसा हुआ था। पुलिस उनकी भूमिका की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस साजिश से उनका कोई संबंध था या नहीं। सीओ सिटी नितेश प्रताप सिंह ने बताया कि आरोपी को हत्या के पुराने मामले में अदालत में पेश कराया जाएगा। फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के मामले में अलग से प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। बीमा कंपनी से 10 लाख रुपये के कथित धोखाधड़ी वाले क्लेम की भी जांच होगी। तस्वीरों में छेड़छाड़ करने वाले और प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका भी खंगाली जा रही है। उन्होंने कहा कि जांच में किसी की संलिप्तता के साक्ष्य मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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