
मुंबई। बाल विवाह मुक्त समाज के निर्माण की दिशा में राज्य सरकार के सहयोग से अंगाई-यूनिसेफ द्वारा चलाए गए जागरूकता अभियान ने धाराशिव जिले के आंबेवाड़ी गांव में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। अभियान के सकारात्मक परिणामस्वरूप पिछले दो वर्षों से गांव में एक भी बाल विवाह नहीं हुआ है। शुक्रवार को यह जानकारी यूनिसेफ द्वारा जारी पत्रक में दी गई। यूनिसेफ के अनुसार, आंबेवाड़ी गांव ने बाल विवाह के खिलाफ एक प्रेरणादायक और सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत किया है। विद्यार्थियों की पहल पर लगातार दो वर्षों से चलाए जा रहे ‘उत्सव समता का’ और ‘मीना राजू मंच’ अभियानों के माध्यम से गांव में सामाजिक बदलाव देखने को मिल रहा है। अंगाई-यूनिसेफ (UNGEI-UNICEF) के सहयोग से धाराशिव जिले में चलाए गए इस अभियान में 120 स्कूल, 800 से अधिक शिक्षक और करीब 18 हजार विद्यार्थियों ने भाग लिया। स्वयं शिक्षण प्रयोग (SSP), कोरो और मावा जैसी स्थानीय संस्थाओं ने भी इसमें सक्रिय भूमिका निभाई। गांव में आयोजित ‘उत्सव समता का’ कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने ढोल-ताशे, लेझीम, गीतों और नारों के माध्यम से बाल विवाह, लैंगिक भेदभाव और बालिकाओं की शिक्षा को लेकर जनजागरूकता फैलाई। ‘बाल विवाह बंद करो’ और ‘बेटियों को शिक्षा दो’ जैसे नारों के साथ विद्यार्थियों ने पूरे गांव में रैली निकालकर लोगों को जागरूक किया। मंदिर परिसर में ग्रामीणों ने बाल विवाह रोकने और हर बेटी को शिक्षा का अवसर देने की सामूहिक शपथ भी ली। गांव की महिलाओं ने भावुक होकर कहा- मेरा विवाह कम उम्र में हुआ था, लेकिन मैं अपनी नातिन को ऐसा जीवन नहीं दूंगी। स्कूलों में आयोजित नाटक, भाषण, वाद-विवाद और भूमिका परिवर्तन जैसे कार्यक्रमों के जरिए विद्यार्थियों ने स्त्री-पुरुष समानता का संदेश दिया। आठवीं कक्षा की छात्रा समीक्षा ने कहा- अब लड़के खाना बनाते हैं और लड़कियां फुटबॉल खेलती हैं। मेरा परिवार अब मेरी शिक्षा और समानता के सपनों का समर्थन करता है। यूनिसेफ के मुताबिक, समानता, शिक्षा और जागरूकता का यह संदेश अब गांव के दैनिक जीवन का हिस्सा बनता जा रहा है, जो ग्रामीण समाज में सकारात्मक बदलाव की नई मिसाल पेश कर रहा है।




