
मुंबई। राज्य के कारागारों के पुनर्विकास, स्थानांतरण और आधुनिकीकरण के लिए शुरू की गई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करने के लिए संबंधित विभागों और एजेंसियों को तेज़ी से कार्यवाही करने के निर्देश गृह (ग्रामीण) राज्यमंत्री डॉ. पंकज भोयर ने दिए। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा 18 मई 2026 को कारागार व्यवस्था के संबंध में आयोजित समीक्षा बैठक में दिए गए निर्देशों के अनुपालन की समीक्षा हेतु मंत्रालय में डॉ. भोयर की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। बैठक में नागपुर, वर्धा और मुंबई केंद्रीय कारागारों के स्थानांतरण एवं पुनर्विकास परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में एमएसआईडीसी के प्रबंध निदेशक बृजेश दीक्षित, कारागार एवं सुधार सेवा विभाग के महानिदेशक सुहास वारके, गृह विभाग (कारागार) के सहसचिव सुग्रीव धपाटे सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे। अधिकारियों ने विभिन्न परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति और प्रगति का प्रस्तुतीकरण किया। डॉ. भोयर ने कहा कि राज्य की कारागार व्यवस्था को आधुनिक बनाने, कैदियों की क्षमता बढ़ाने तथा अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के दृष्टिकोण से ये परियोजनाएं अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इसलिए सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए परियोजनाओं को समय पर पूरा करना चाहिए। बैठक में मानखुर्द में आधुनिक बहुमंजिला कारागार तथा अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए सरकारी आवास निर्माण, मंडाले में कारागार मुख्यालय की प्रशासनिक इमारत का निर्माण, मड आइलैंड (दारवली, बोरीवली) में उच्च सुरक्षा कारागार, प्रशिक्षण केंद्र और सरकारी आवासों की स्थापना, तथा मुंबई केंद्रीय कारागार के पुनर्विकास के साथ नए कारागार एवं आवासीय परिसर के निर्माण की प्रगति की समीक्षा की गई। इसके अलावा नागपुर केंद्रीय कारागार को स्थानांतरित कर नई निर्धारित भूमि पर केंद्रीय, जिला एवं खुला कारागार विकसित करने, साथ ही वर्धा जिला कारागार को स्थानांतरित कर नए वर्धा केंद्रीय कारागार और सरकारी आवासों के निर्माण से संबंधित कार्यों का भी विस्तृत आकलन किया गया। राज्यमंत्री डॉ. भोयर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं का त्वरित समाधान किया जाए और कार्यों में तेजी लाई जाए। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से राज्य की कारागार व्यवस्था अधिक सुरक्षित, आधुनिक, व्यवस्थित और क्षमता-संपन्न बनेगी, जिससे बंदियों के पुनर्वास और प्रशासनिक कार्यक्षमता दोनों को मजबूती मिलेगी।



