
मुंबई। महाराष्ट्र सरकार नासिक को भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान-प्रौद्योगिकी के संगम वाले देश के अग्रणी शैक्षणिक केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। शुक्रवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, दिल्ली के प्रस्तावित नासिक परिसर के लिए आरक्षित 16.80 हेक्टेयर (करीब 41.51 एकड़) भूमि का 7/12 उतारा विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों को सौंपा। इस अवसर पर केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो.आर.जी.मुरलीकृष्ण, मुख्य कार्यकारी अधिकारी मंगेश इंदापवार, विभागीय आयुक्त डॉ. प्रवीण गेडाम, नासिक के जिलाधिकारी आयुष प्रसाद तथा अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को आधुनिक अनुसंधान और तकनीक से जोड़ने वाली शिक्षण संस्थाएं समय की आवश्यकता हैं। नासिक में बनने वाला केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर इसी सोच का साकार रूप होगा। इससे विद्यार्थियों को संस्कृत के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डेटा साइंस और आधुनिक तकनीकी विषयों की पढ़ाई का अवसर मिलेगा, वहीं अनुसंधान और नवाचार को भी नई गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि नासिक अब तक धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी के रूप में प्रसिद्ध रहा है, लेकिन इस परियोजना के बाद यह उच्च शिक्षा, अनुसंधान और तकनीकी अध्ययन के राष्ट्रीय केंद्र के रूप में भी नई पहचान बनाएगा। राज्य सरकार इस परियोजना के लिए हरसंभव सहयोग दे रही है और प्रशासन को निर्माण कार्य की प्रक्रिया तेजी से पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। नासिक जिले के शिलापुर गांव में प्रस्तावित नासिक रिंग रोड के समीप स्थित इस भूमि का स्वामित्व विश्वविद्यालय के नाम दर्ज हो गया है। 7/12 उतारा हस्तांतरित होने से अब परियोजना से जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रियाओं में तेजी आएगी। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अधीन कार्यरत केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ने नासिक में अत्याधुनिक बहुविषयक शैक्षणिक परिसर विकसित करने का प्रस्ताव तैयार किया है। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी के नेतृत्व में लगभग 400 करोड़ रुपये की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की गई है, जो केंद्र सरकार के विचाराधीन है। प्रस्तावित परिसर में संस्कृत माध्यम से बी.टेक. (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं डेटा साइंस) सहित आधुनिक और पारंपरिक विषयों के विभिन्न पाठ्यक्रम संचालित किए जाएंगे। संस्कृत माध्यम में एआई और डेटा साइंस जैसे अभिनव पाठ्यक्रम शुरू करने की पहल की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सराहना कर चुके हैं। मुख्यमंत्री फडणवीस ने विश्वास व्यक्त किया कि लगभग 1,500 विद्यार्थियों की क्षमता वाला यह परिसर भारतीय ज्ञान परंपरा और अत्याधुनिक तकनीक का अनूठा संगम बनकर देश के प्रमुख शिक्षा एवं अनुसंधान केंद्रों में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करेगा।

