
नई दिल्ली। भारतीय शौर्य के प्रतीक और करोड़ों देशवासियों की आस्था के केंद्र छत्रपति शिवाजी महाराज की भव्य अश्वारूढ़ प्रतिमा अब जम्मू-कश्मीर में भारत-पाकिस्तान सीमा के समीप स्थित पुंछ में स्थापित की जाएगी। इस ऐतिहासिक अवसर के तहत सोमवार को पुणे से निकली भव्य ‘शिवस्वराज्य यात्रा’ राजधानी दिल्ली स्थित महाराष्ट्र सदन पहुंची, जहां ‘जय भवानी, जय शिवाजी’ के उद्घोष के बीच प्रतिमा और रथ का उत्साहपूर्वक स्वागत किया गया। कार्यक्रम के दौरान महाराष्ट्र सदन की निवासी आयुक्त एवं सचिव आर. विमला, महाराष्ट्र परिचय केंद्र के निदेशक हेमराज बागुल, सहायक निवासी आयुक्त स्मिता शेलार, जनसंपर्क अधिकारी मनीषा पिंगळे तथा ‘आम्ही पुणेकर’ संस्था के अध्यक्ष हेमंत जाधव सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने विधिवत पूजन किया। दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में मराठी समाज के लोग भी उपस्थित रहे। आयुक्त आर. विमला ने कहा कि भारतीय सेना सीमा पर साहसपूर्वक अपनी जिम्मेदारी निभा रही है। ऐसे में सीमा पर स्थापित की जाने वाली यह प्रतिमा सैनिकों और नागरिकों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी। यह प्रतिमा पुणे से रवाना होकर मुंबई, बड़ौदा, अहमदाबाद, उदयपुर और जयपुर होते हुए दिल्ली पहुंची है। यहां से यह रथ पानीपत और पठानकोट मार्ग से पुंछ जाएगा। यात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर शिवभक्तों द्वारा भव्य स्वागत किया जा रहा है। विशेष बात यह है कि स्मारक के भूमिपूजन के लिए महाराष्ट्र के साल्हेर, शिवनेरी, लोहगढ़, रायगढ़, प्रतापगढ़ सहित यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल 11 किलों तथा तमिलनाडु के जिंजी किले की पवित्र मिट्टी और जल साथ ले जाया जा रहा है। इस नौ फुट ऊंची प्रतिमा का निर्माण पुणे के वरिष्ठ शिल्पकार विवेक खटावकर तथा उनके परिवार की तीसरी पीढ़ी के कलाकार विपुल और विराज खटावकर ने किया है। उच्च गुणवत्ता वाले फाइबर से निर्मित यह प्रतिमा आकर्षक और प्रेरणादायी स्वरूप में तैयार की गई है। इससे पहले नवंबर 2023 में जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में भी शिवाजी महाराज की प्रतिमा स्थापित की गई थी। इस ऐतिहासिक पहल का आयोजन ‘आम्ही पुणेकर’ संस्था, ‘श्री शिवाजी रायगढ़ स्मारक मंडल’ और ‘श्री शिवशंभू विचार मंच’ द्वारा किया गया है। इस कार्य में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार तथा सांस्कृतिक कार्य मंत्री एडवोकेट आशिष शेलार का विशेष सहयोग प्राप्त हुआ है। स्मारक की सुरक्षा और देखरेख की पूरी जिम्मेदारी भारतीय सेना की ‘मराठा लाइट इन्फैंट्री’ को सौंपी गई है। यह स्थल नियंत्रण रेखा (एलओसी) से लगभग 500 मीटर की दूरी पर स्थित है, जहां 500 जवान तैनात रहेंगे। यहां शिवाजी महाराज के जीवन और पराक्रम पर आधारित संग्रहालय और ‘लाइट एंड साउंड’ शो आयोजित करने की भी योजना है, ताकि सैनिकों और पर्यटकों को इतिहास से प्रेरणा मिल सके। मार्च के प्रथम सप्ताह में इस अश्वारूढ़ प्रतिमा का औपचारिक अनावरण किया जाएगा, जो हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण होगा।




