स्वच्छता, शुद्ध पेयजल और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर रहेगा जोर: मंत्री दादाजी भुसे

मुंबई। महाराष्ट्र के प्रत्येक स्कूल में स्वच्छता, शुद्ध पेयजल, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और विद्यार्थी-केंद्रित वातावरण सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी अब सीधे स्कूलों का दौरा करेंगे। बैठकों और समीक्षा के दौरान बनाई जाने वाली योजनाओं का असर स्कूलों की व्यवस्था और विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति में दिखाई देना चाहिए। इसके लिए राज्यभर में ‘चलो स्कूल चलें’ विशेष अभियान चलाया जाएगा। यह घोषणा महाराष्ट्र के स्कूली शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे ने की।मुंबई के बाल भवन में शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के लिए आयोजित एक दिवसीय ‘शिक्षण संवाद’ कार्यशाला में भुसे ने कहा कि शिक्षा का कोई विकल्प नहीं है और ‘ज्ञान मंदिरों का सशक्तीकरण’ सरकार, प्रशासन और समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। कार्यशाला में स्कूली शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव रणजीत सिंह देओल, आयुक्त सचिंद्र प्रताप सिंह सहित विभाग के सभी निदेशक, उपनिदेशक और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। भुसे ने कहा कि शिक्षा विभाग को केवल प्रशासनिक कामकाज तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों, स्कूल प्रबंधन समितियों और ग्रामीणों से सीधा संवाद स्थापित करना चाहिए। इसके लिए राज्य के सभी आठ संभागों में वरिष्ठ अधिकारियों को जिलावार जिम्मेदारी सौंपी जाएगी और प्रत्येक जिले की अलग से समीक्षा की जाएगी। वरिष्ठ अधिकारी चार दिवसीय विशेष दौरे के दौरान विभिन्न स्कूलों में जाकर वहां की वास्तविक स्थिति का मूल्यांकन करेंगे। स्कूलों में स्वच्छता, पेयजल, शैक्षणिक गुणवत्ता, विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं और समग्र वातावरण की जमीनी स्तर पर समीक्षा की जाएगी। जिन स्कूलों में सकारात्मक बदलाव और बेहतर कार्य दिखाई देगा, उन्हें विभिन्न माध्यमों से प्रोत्साहित किया जाएगा। स्कूली शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे ने स्पष्ट किया कि केवल बैठकों में योजनाएं तैयार करना पर्याप्त नहीं है। इन योजनाओं का वास्तविक परिणाम स्कूलों और विद्यार्थियों की प्रगति में दिखाई देना चाहिए। इसी उद्देश्य से ‘चलो स्कूल चलें’ अभियान के माध्यम से शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को सीधे स्कूलों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

