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चंद्रपुर में ‘डिग्री की दुकान’ का पर्दाफाश: आठ साल में बेचीं करीब 40 फर्जी डिग्रियां

मार्कशीट से माइग्रेशन सर्टिफिकेट तक बनाने का आरोप, कथित मास्टरमाइंड समेत तीन गिरफ्तार; दूसरे शहरों तक नेटवर्क की आशंका

चंद्रपुर। महाराष्ट्र के चंद्रपुर में फर्जी डिग्री, मार्कशीट, डिप्लोमा और माइग्रेशन सर्टिफिकेट तैयार कर बेचने वाले कथित रैकेट का खुलासा हुआ है। पुलिस जांच में अब तक सामने आया है कि यह नेटवर्क करीब आठ वर्षों से सक्रिय था और इसके जरिए लगभग 40 फर्जी डिग्रियां बेची गईं। हालांकि पुलिस को आशंका है कि जांच आगे बढ़ने पर यह आंकड़ा काफी बड़ा हो सकता है। मामले में कथित मास्टरमाइंड परिमल गौरकर समेत अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक, परिमल गौरकर को इस पूरे रैकेट का कथित सूत्रधार माना जा रहा है। वह चंद्रपुर के तुकुम इलाके में एसटी वर्कशॉप चौक के पास रहता था। बताया जा रहा है कि गौरकर पढ़ा-लिखा होने के साथ आलीशान जीवनशैली के लिए भी जाना जाता था। पुलिस को संदेह है कि वह वर्ष 2018 से फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज उपलब्ध कराने के धंधे में सक्रिय था। इस पूरे मामले के सामने आने की कहानी भी चौंकाने वाली है। बताया जा रहा है कि जनवरी में गौरकर ने अपने एक पड़ोसी के पास कपड़े का एक बैग रख छोड़ा था। कई महीने गुजरने के बावजूद जब वह बैग लेने नहीं लौटा तो उसमें मौजूद सामान को लेकर संदेह पैदा हुआ। इसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा और जांच की कड़ियां जुड़ती चली गईं। इसी दौरान कथित फर्जी डिग्री रैकेट की परतें खुलनी शुरू हुईं। जांचकर्ताओं को आशंका है कि नेटवर्क केवल डिग्रियां ही नहीं, बल्कि फर्जी मार्कशीट, डिप्लोमा और माइग्रेशन सर्टिफिकेट जैसे महत्वपूर्ण शैक्षणिक दस्तावेज भी तैयार करता था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, अब तक करीब 40 फर्जी डिग्रियां बेचे जाने की जानकारी मिली है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इन दस्तावेजों को किन-किन लोगों ने खरीदा और उनका इस्तेमाल नौकरी, उच्च शिक्षा में प्रवेश या अन्य सरकारी एवं निजी कामों के लिए तो नहीं किया गया। पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि फर्जी दस्तावेज आखिर तैयार कैसे किए जाते थे। क्या इस काम में शिक्षण संस्थानों या अन्य एजेंसियों से जुड़े किसी व्यक्ति की मदद ली जा रही थी? दस्तावेजों पर इस्तेमाल होने वाली मुहर, हस्ताक्षर और अन्य विवरण कहां से हासिल किए जाते थे? इसके अलावा पुलिस यह भी जांच रही है कि कथित मास्टरमाइंड के अपने शैक्षणिक प्रमाणपत्र वास्तविक हैं या उनमें भी किसी प्रकार की गड़बड़ी है। जांच का दायरा अब चंद्रपुर तक सीमित नहीं माना जा रहा है। पुलिस को शक है कि नेटवर्क के तार महाराष्ट्र के अन्य शहरों तक भी फैले हो सकते हैं। जांचकर्ता उन लोगों की पहचान करने में जुटे हैं जिन्होंने दस्तावेज तैयार करने, ग्राहक खोजने या पैसे के लेन-देन में आरोपियों की मदद की। इसके साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि आठ वर्षों के दौरान इस कथित कारोबार से कुल कितनी रकम कमाई गई। मामले के कथित मास्टरमाइंड परिमल गौरकर को शुक्रवार को नागपुर से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने उसके कथित सहयोगी अक्षय खोबरागड़े को भी हिरासत में लिया। दोनों को शनिवार को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। इससे पहले फर्जी डिग्री, डिप्लोमा और मार्कशीट मामले में गिरफ्तार वैभव सोनूले को न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है। इस तरह मामले में अब तक तीन आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। खासतौर पर उन लोगों की सूची तैयार की जा रही है जिन्होंने कथित रूप से फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्र खरीदे थे। यदि ऐसे प्रमाणपत्रों के आधार पर किसी ने नौकरी या प्रवेश हासिल किया है तो संबंधित लोगों की मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं। देश के विभिन्न हिस्सों में परीक्षा और भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितताओं को लेकर उठ रहे सवालों के बीच चंद्रपुर का यह मामला शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता के लिए गंभीर चुनौती बनकर सामने आया है। पुलिस को आशंका है कि जांच आगे बढ़ने के साथ और नाम सामने आ सकते हैं तथा गिरफ्तारियों की संख्या भी बढ़ सकती है।

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