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वर्सोवा-बांद्रा सी लिंक को 1,421 दिनों की मोहलत, ठेकेदार पर जुर्माना क्यों नहीं?

मुंबई। मुंबई की महत्वाकांक्षी वर्सोवा-बांद्रा सी लिंक (VBSLP) परियोजना के काम में भारी देरी का मामला महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) द्वारा सूचना के अधिकार के तहत दी गई जानकारी से सामने आया है। परियोजना की नियुक्ति तिथि 24 जून 2019 थी और मूल अनुबंध के अनुसार इसे 21 जून 2024 तक पूरा किया जाना था। लेकिन विभिन्न कारणों से परियोजना को चार चरणों में कुल 1,421 दिनों की मोहलत दी गई है और अब इसकी अंतिम संशोधित पूर्णता तिथि 17 मई 2028 कर दी गई है। खास बात यह है कि इस गंभीर देरी के बावजूद Webuild-Apco JV ठेकेदार पर कोई जुर्माना नहीं लगाया गया है।MSRDC द्वारा अनिल गलगली के सूचना अधिकार आवेदन के जवाब में दी गई जानकारी के अनुसार, परियोजना के लिए पहली मोहलत 23 जून 2020 को 250 दिनों की दी गई। इसका प्रमुख कारण कास्टिंग यार्ड के लिए आवश्यक जमीन उपलब्ध न होना बताया गया। इसके बाद 14 सितंबर 2020 को 180 दिनों की अतिरिक्त मोहलत कोविड-19 महामारी के कारण लगे प्रतिबंधों और काम में आई बाधाओं के चलते दी गई। आगे 10 फरवरी 2022 को 483 दिनों की मोहलत EPC ठेकेदार के Joint Venture (JV) में पुनर्गठन अथवा बदलाव के कारण मंजूर की गई। इसके बाद 19 जनवरी 2024 को 508 दिनों की और मोहलत काम के दायरे में बदलाव (Change of Scope) तथा अतिरिक्त कार्यों के कारण दी गई। इन चारों मोहलतों की कुल अवधि 1,421 दिन है और परियोजना की अंतिम संशोधित पूर्णता तिथि 17 मई 2028 निर्धारित की गई है।MSRDC के 23 जून 2020 के पत्र के अनुसार, ठेकेदार ने 24 जून 2019 से 30 अप्रैल 2020 तक की अवधि के लिए लगभग 311 दिनों की मोहलत मांगी थी। इस अवधि में देरी के कारणों में विभिन्न घटनाओं के साथ कोविड-19 महामारी का भी उल्लेख किया गया था। इसके बाद परियोजना के लिए संशोधित कार्य चरण और समयसीमा निर्धारित की गई। वहीं, 19 जनवरी 2024 के MSRDC पत्र में काम के दायरे में बदलाव और संशोधित कार्य चरणों के अनुसार आगे की मोहलत का उल्लेख किया गया है।परियोजना को बार-बार मोहलत दिए जाने के बावजूद काम में देरी के लिए Webuild-Apco JV ठेकेदार पर दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की गई, यह गंभीर सवाल है। सूचना अधिकार कार्यकर्ता एवं वरिष्ठ पत्रकार अनिल गलगली ने कहा कि सार्वजनिक धन से बनाई जा रही इस महत्वपूर्ण परियोजना में देरी का आर्थिक बोझ अंततः सरकारी खजाने और आम जनता पर पड़ सकता है। इसलिए Webuild-Apco JV को केवल समय बढ़ाकर राहत देने के बजाय अनुबंध में निर्धारित दंडात्मक प्रावधानों को सख्ती से लागू किया जाना चाहिए।“वर्सोवा-बांद्रा सी लिंक परियोजना को कुल 1,421 दिनों की मोहलत दी गई है। परियोजना की मूल पूर्णता अवधि 21 जून 2024 थी, जबकि अब अंतिम समयसीमा 17 मई 2028 तक पहुंच गई है। परियोजना में देरी के कारण जनता का पैसा और समय दोनों खर्च हो रहे हैं। इसलिए केवल कारण बताकर मामला समाप्त करने के बजाय, काम में देरी के लिए जिम्मेदार Webuild-Apco JV ठेकेदार पर अनुबंध के प्रावधानों के अनुसार तत्काल Liquidated Damages (LD) अर्थात नुकसान की भरपाई का जुर्माना लगाया जाए और उसकी वसूली की जाए,” ऐसी मांग अनिल गलगली ने की है।गलगली ने आगे कहा, “मोहलत का अर्थ Webuild-Apco JV ठेकेदार को काम में देरी करने की छूट देना नहीं है। देरी के कुछ कारण भले ही स्वीकार्य हों, लेकिन अनुबंध में निर्धारित जिम्मेदारियों और दंडात्मक प्रावधानों को लागू किया जाना चाहिए। 24 जून 2019 की नियुक्ति तिथि वाली इस परियोजना की अंतिम समयसीमा 17 मई 2028 तक पहुंचना बेहद गंभीर मामला है। इसलिए प्रत्येक मोहलत के पीछे के कारण, देरी के लिए जिम्मेदार पक्ष, हुए अतिरिक्त आर्थिक बोझ तथा Liquidated Damages लागू किए गए हैं या नहीं, इसकी स्पष्ट जानकारी MSRDC को जनता के सामने रखनी चाहिए।”वर्सोवा-बांद्रा सी लिंक मुंबई की यातायात व्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण परियोजना है। हालांकि, काम में लगातार हो रही देरी के कारण परियोजना की अवधि बढ़ती जा रही है। इसलिए महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम को देरी के कारणों और जिम्मेदारी को स्पष्ट रूप से निर्धारित कर Webuild-Apco JV ठेकेदार की जिम्मेदारी वाले विलंब के लिए अनुबंध के अनुसार जुर्माना लगाकर उसकी वसूली करनी चाहिए। साथ ही परियोजना की बढ़ी हुई अवधि के कारण सरकारी खजाने पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े, यह सुनिश्चित करने की मांग सूचना अधिकार कार्यकर्ता अनिल गलगली ने की है।

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