हिंदी के प्रभावी प्रयोग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और भाषाई विविधता पर हुआ मंथन

कोलकाता। रेलटेल कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड ने राजभाषा हिंदी के प्रभावी एवं प्रगतिशील प्रयोग को बढ़ावा देने तथा राजभाषा के क्षेत्र में उभरते अवसरों और चुनौतियों पर विचार-विमर्श के उद्देश्य से अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन का आयोजन किया।कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगीत, दीप प्रज्ज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ हुई। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए रेलटेल के पूर्वी क्षेत्र के प्रधान कार्यकारी निदेशक जाकिर हुसैन सिद्दीकी ने हिंदी के प्रचार-प्रसार के महत्व पर प्रकाश डाला और संगठन में हिंदी के उपयोग को बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। इस अवसर पर रेलटेल की राजभाषा गतिविधियों और उपलब्धियों पर एक प्रस्तुति भी दी गई तथा राजभाषा पत्रिका ‘तविशी’ के विशेषांक का विमोचन किया गया। रेलटेल के निदेशक (पीओएम) मनोज टंडन ने अपनी स्वरचित कविता का पाठ किया। वहीं, नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (टोलिक/नराकास) के सदस्य सचिव राजेश बी. नायर ने राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए रेलटेल के प्रयासों की सराहना की।रेलटेल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक संजय कुमार ने अपने संबोधन में विशेष रूप से गैर-हिंदी भाषी क्षेत्रों के कर्मचारियों को हिंदी सीखने और अपने दैनिक कार्यालयीन कार्यों में उसका उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करने पर बल दिया। उन्होंने यह भी कहा कि हिंदी के साथ-साथ सभी भारतीय भाषाओं को समान सम्मान दिया जाना चाहिए।मुख्य अतिथि एवं मेट्रो रेलवे के महाप्रबंधक प्रेम सागर गुप्ता ने कहा कि हिंदी का प्रयोग केवल औपचारिक आयोजनों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे दैनिक जीवन और कार्यस्थल की स्वाभाविक भाषा बनाया जाना चाहिए।सम्मेलन के दौरान एआईएलजीओ टेक्नोलॉजीज़, दुबई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) बलेंदु शर्मा ‘दधीच’ ने ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता और राजभाषा : अवसर, चुनौतियां और भविष्य’ विषय पर व्याख्यान दिया। इसके अलावा डॉ. बरुण कुमार और प्रो. अमर पाल शर्मा ने भी राजभाषा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम के अंतर्गत समाचार वाचन और हिंदी प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया। सम्मेलन के माध्यम से रेलटेल ने राजभाषा हिंदी के प्रगतिशील उपयोग, ज्ञान के आदान-प्रदान तथा भारत की भाषाई विविधता के सम्मान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

