
मुंबई। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को बताया कि बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए सयोना कलर्स प्राइवेट लिमिटेड और उससे जुड़ी संस्थाओं की 9.19 करोड़ रुपये मूल्य की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से ज़ब्त कर लिया है। एजेंसी का आरोप है कि बैंक से लिए गए ऋण की राशि को फर्जी समझौतों और सर्कुलर ट्रांज़ैक्शन के माध्यम से प्रमोटरों और समूह की अन्य कंपनियों में डायवर्ट किया गया। ईडी के अनुसार, ज़ब्त की गई संपत्तियों में चार कृषि भूमि, दो औद्योगिक भूखंड, एक आवासीय फ्लैट, टर्म डिपॉजिट तथा दो डीमैट खातों में रखे इक्विटी शेयर शामिल हैं। एजेंसी का कहना है कि इन संपत्तियों की खरीद कथित रूप से बैंक फंड के दुरुपयोग और डायवर्जन से हुई “अपराध की कमाई” (Proceeds of Crime) से की गई थी।
कुल ज़ब्ती बढ़कर ₹9.62 करोड़
प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत की गई इस कार्रवाई के बाद मामले में अब तक ज़ब्त कुल संपत्तियों का मूल्य 9.62 करोड़ रुपये हो गया है। यह इस प्रकरण में ईडी द्वारा जारी किया गया दूसरा अस्थायी ज़ब्ती आदेश है।
सीबीआई की एफ़आईआर के आधार पर शुरू हुई जांच
ईडी की अहमदाबाद ज़ोनल यूनिट ने सीबीआई की बैंकिंग सिक्योरिटीज़ एंड फ्रॉड ब्रांच (BS&FB), मुंबई द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी। एफआईआर में सयोना कलर्स प्राइवेट लिमिटेड, उसके निदेशक परेश डी. पटेल, शैमरॉक केमी प्राइवेट लिमिटेड, उसके निदेशकों और अन्य आरोपियों को नामज़द किया गया है।
₹71.88 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी का आरोप
जांच एजेंसी का आरोप है कि आरोपियों ने फर्जी व्यावसायिक समझौतों और सर्कुलर ट्रांज़ैक्शन के जरिए अपनी वित्तीय स्थिति को वास्तविक से बेहतर दिखाया और बैंकों से अधिक क्रेडिट लिमिट हासिल की। इसके बाद 71.88 करोड़ रुपये के बैंक ऋण को कथित रूप से समूह की कंपनियों और प्रमोटरों के हित में डायवर्ट कर दिया गया। ईडी का दावा है कि ऋण की राशि का उपयोग प्रमोटरों और समूह की कंपनियों के नाम पर संपत्तियां खरीदने तथा लेटर ऑफ क्रेडिट (LC) सुविधा के दुरुपयोग के माध्यम से संबंधित कंपनियों में धन स्थानांतरित करने के लिए किया गया।
सर्कुलर ट्रांज़ैक्शन से बढ़ा-चढ़ाकर दिखाई वित्तीय स्थिति
जांच में यह भी सामने आया कि सयोना कलर्स और शैमरॉक केमी ने समूह की अन्य कंपनियों के साथ सर्कुलर ट्रांज़ैक्शन किए, जिससे कंपनियों की वित्तीय स्थिति को मजबूत दिखाया गया। ईडी के अनुसार, इसका उद्देश्य बैंकों को अधिक ऋण और क्रेडिट सुविधाएं मंजूर करने के लिए प्रेरित करना था। फिलहाल मामले की जांच जारी है और एजेंसी बैंक धन के कथित दुरुपयोग से जुड़े अन्य वित्तीय लेन-देन और संपत्तियों की भी जांच कर रही है।

