
मुंबई। महाराष्ट्र में पिछले पांच वर्षों के दौरान जिन गांवों में टैंकरों के माध्यम से पेयजल आपूर्ति करनी पड़ी, उन सभी जलसंकटग्रस्त गांवों को ‘जलयुक्त शिवार अभियान 3.0’ में प्राथमिकता से शामिल कर वहां जलसंवर्धन और जलसंधारण के कार्य तत्काल शुरू किए जाएं। बुधवार को यह निर्देश मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने वर्षा निवास पर आयोजित मृदा एवं जलसंधारण प्रबंधन संबंधी समीक्षा बैठक में दिए। बैठक में मृदा एवं जलसंधारण मंत्री संजय राठोड सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। इस दौरान राज्य में जलसंधारण कार्यों, जलस्रोतों के सुदृढ़ीकरण तथा विभिन्न विभागों के समन्वय से जल प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने पर विस्तृत चर्चा की गई। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि राज्य के सूक्ष्म जलग्रहण (माइक्रो वॉटरशेड) क्षेत्रों के विकास और जलस्रोतों को मजबूत करने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। जिन परियोजनाओं के कार्य निर्धारित किए गए हैं, उनके लिए आवश्यक निधि उपलब्ध कराई जाएगी। इन कार्यों को तेजी से पूरा करने के लिए सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ नियोजन करें, ताकि जलसंधारण कार्य अधिक प्रभावी और परिणामकारी ढंग से पूरे किए जा सकें। उन्होंने निर्देश दिए कि पिछले पांच वर्षों में जिन गांवों में टैंकरों से पानी की आपूर्ति करनी पड़ी, उनका विशेष सर्वेक्षण कराया जाए और उन्हें ‘जलयुक्त शिवार अभियान 3.0’ में प्राथमिकता दी जाए। इन गांवों की स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों और जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए जलसंधारण कार्यों की योजना बनाई जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जलस्रोतों के सुदृढ़ीकरण से हुए सकारात्मक परिणामों को आम नागरिकों तक पहुंचाने के लिए जलसंधारण से जुड़ी सफल कहानियों (सक्सेस स्टोरीज़) तैयार कर उनका प्रभावी प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि जल संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़े और अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

