
सिकंदराबाद। दक्षिण मध्य रेलवे (SCR) ने रेल परिचालन को अधिक सुरक्षित और दक्ष बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे के साथ मंगलवार को एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। इस साझेदारी का उद्देश्य रेलवे जंक्शन और यार्ड की क्षमता, भीड़भाड़ और परिचालन संबंधी चुनौतियों का वैज्ञानिक विश्लेषण करने के लिए अत्याधुनिक तकनीकी ढांचा और मॉडल विकसित करना है। समझौते पर हस्ताक्षर के अवसर पर दक्षिण मध्य रेलवे के महाप्रबंधक संजय कुमार श्रीवास्तव, प्रधान मुख्य अभियंता डी. अंजनेयुलु रेड्डी, सिकंदराबाद मंडल के मंडल रेल प्रबंधक डॉ.आर.गोपालकृष्णन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। वहीं IIT बॉम्बे की ओर से प्रोफेसर मिलिंद सोहोनी और उनकी टीम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम में शामिल हुई। दक्षिण मध्य रेलवे के अनुसार, IIT बॉम्बे की टीम पिछले दो वर्षों से रेलवे यार्डों की क्षमता और परिचालन संबंधी समस्याओं पर शोध कर रही है। इस दौरान यार्ड डायग्राम, ट्रेनों की गति, ट्रेन की लंबाई, सिग्नलिंग व्यवस्था, इंटरलॉकिंग सिस्टम, डेटा लॉगर की जानकारी तथा विभिन्न सिमुलेशन मॉडल का अध्ययन किया गया। अब इस समझौते के माध्यम से दोनों संस्थानों के बीच इस सहयोग को औपचारिक रूप दिया गया है। समझौते के तहत IIT बॉम्बे एक अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर विकसित करेगा, जो रेलवे के डेटा लॉगर से प्राप्त बड़ी मात्रा में सिग्नलिंग डेटा का विश्लेषण कर उसे सरल और उपयोगी जानकारी में परिवर्तित करेगा। यह सॉफ्टवेयर ट्रेनों की आवाजाही, क्रॉसिंग, शंटिंग, रुकावट और अन्य परिचालन गतिविधियों का दृश्यात्मक विश्लेषण उपलब्ध कराएगा। इससे रेलवे अधिकारियों को परिचालन में आने वाली बाधाओं की पहचान करने, ट्रेनों की देरी के कारणों का अध्ययन करने तथा रेल संचालन की दक्षता और सुरक्षा में सुधार करने में मदद मिलेगी। परियोजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। पहले चरण में डेटा का सत्यापन, ट्रेन मूवमेंट का विश्लेषण, विजुअलाइजेशन टूल और सुरक्षा व दक्षता से जुड़े मानकों का विकास किया जाएगा। पायलट परियोजना के सफल होने के बाद इसे बड़े रेलवे स्टेशनों और यार्डों तक विस्तारित किया जाएगा तथा भविष्य में इसे रेलवे की सिग्नलिंग प्रणाली के साथ जोड़कर रियल-टाइम ट्रेन मूवमेंट विश्लेषण की सुविधा भी विकसित की जाएगी। इस अवसर पर दक्षिण मध्य रेलवे के महाप्रबंधक संजय कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि भारतीय रेलवे में प्रतिदिन रेल यातायात लगातार बढ़ रहा है, जबकि भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में स्थित यार्डों के विस्तार की संभावनाएं सीमित हैं। ऐसे में प्रत्येक निवेश का निर्णय वैज्ञानिक विश्लेषण और मजबूत इंजीनियरिंग के आधार पर होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि IIT बॉम्बे के सहयोग से विकसित होने वाला यह अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर विभिन्न परिस्थितियों का सिमुलेशन कर उनके प्रभाव का पूर्व विश्लेषण करने में सक्षम होगा। इससे यार्ड रीमॉडलिंग और इंटरलॉकिंग व्यवस्था में छोटे-छोटे बदलावों के प्रभाव को पहले ही समझा जा सकेगा और उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम एवं सुरक्षित उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा। दक्षिण मध्य रेलवे का मानना है कि यह साझेदारी भविष्य में रेलवे के परिचालन को अधिक सुरक्षित, आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी।

