
जीएमपी नियमों के उल्लंघन और छह दवाएं मानक से घटिया मिलने पर कार्रवाई
मुंबई। महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफ़डीए) ने पुणे जिले के जेजुरी स्थित इंड्युकेअर फार्मा प्रा.लि. के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए कंपनी का आयुर्वेदिक औषधि निर्माण लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द कर दिया है। कंपनी पर गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (जीएमपी) तथा औषधि एवं प्रसाधन अधिनियम, 1940 और नियम, 1945 के गंभीर उल्लंघन का आरोप है। जांच में कंपनी द्वारा निर्मित छह आयुर्वेदिक दवाएं मानक गुणवत्ता (Not of Standard Quality-NSQ) से कम पाई गईं। गुरुवार को महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने बताया कि नागरिकों को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और प्रभावी दवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से दवा निर्माण इकाइयों की नियमित एवं जोखिम आधारित जांच की जाती है। इसी क्रम में पुणे जिले के पुरंदर तालुका स्थित इंड्युकेअर फार्मा प्रा लि., जेजुरी एमआईडीसी का दो बार निरीक्षण किया गया। निरीक्षण में जीएमपी मानकों और कानून के कई प्रावधानों का गंभीर उल्लंघन सामने आया।
जांच में सामने आईं गंभीर अनियमितताएं
निरीक्षण के दौरान पाया गया कि कंपनी के पास स्वीकृत आयुर्वेदिक फार्मूले के अनुसार कच्चे माल के उपयोग का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था। बैच मैन्युफैक्चरिंग रिकॉर्ड (BMR) अधूरे और त्रुटिपूर्ण पाए गए। कच्चे माल के बैच नंबर, विश्लेषण रिपोर्ट, उत्पादन प्रक्रिया, वजन में अंतर, यील्ड कैलकुलेशन और वितरण रिकॉर्ड जैसी अनिवार्य जानकारियां दर्ज नहीं थीं।
इसके अलावा मशीनों की सफाई का रिकॉर्ड, उपकरणों की लॉग बुक, प्रक्रिया सत्यापन (Process Validation), कच्चे माल की गुणवत्ता जांच, एक्सिपिएंट्स की जांच तथा माइक्रोबायोलॉजिकल परीक्षण से जुड़े आवश्यक रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं थे। जांच में उत्पादन इकाई में गंदगी, क्षतिग्रस्त छलनियां, खराब फर्श, गंदे सक्शन फिल्टर, मशीनों पर तेल की परत और उत्पादन मशीनों में अनधिकृत तरीके से कागज का उपयोग भी पाया गया। तापमान और आर्द्रता मापने के लिए आवश्यक हाइग्रोमीटर तक उपलब्ध नहीं था।
छह दवाएं निकलीं मानक से घटिया
कंपनी द्वारा निर्मित दवाओं के नमूने महाराष्ट्र शासन के सरकारी विश्लेषक को भेजे गए थे। जांच रिपोर्ट में छह दवाओं को “नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी (NSQ)” घोषित किया गया। इनमें सिंहनाद गुग्गुल और पुनर्नवादि मंडूर में फफूंद (फंगल ग्रोथ) तथा माइक्रोबियल परीक्षण में गंभीर खामियां मिलीं। त्रिफला गुग्गुल और कांचनार गुग्गुल निर्धारित माइक्रोबियल मानकों पर खरी नहीं उतरीं। वहीं हींगवाष्टक चूर्ण और त्रिफला चूर्ण में कीड़े, लार्वा, बाहरी अशुद्धियां और अन्य गुणवत्ता संबंधी गंभीर दोष पाए गए।
नोटिस और सुनवाई के बाद लाइसेंस रद्द
जांच के बाद कंपनी को तत्काल उत्पादन बंद करने के निर्देश दिए गए और कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। कंपनी का लिखित जवाब मिलने के बाद व्यक्तिगत सुनवाई भी की गई, लेकिन कंपनी संतोषजनक स्पष्टीकरण या नियमों के पालन के पर्याप्त प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सकी। इसके बाद निरीक्षण रिपोर्ट, उपलब्ध दस्तावेज, नोटिस और सुनवाई के आधार पर लाइसेंसिंग प्राधिकरण ने इंड्युकेअर फार्मा प्रा.लि. का आयुर्वेदिक औषधि निर्माण लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द करने का आदेश जारी कर दिया।
गुणवत्ता से समझौता बर्दाश्त नहीं : तुकाराम मुंढे
महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन के आयुक्त तुकाराम मुंढे ने कहा कि नागरिकों को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और प्रभावी दवाएं उपलब्ध कराना विभाग की सर्वोच्च जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि सभी दवा निर्माता कंपनियों के लिए औषधि एवं प्रसाधन अधिनियम, 1940, उसके तहत बने नियमों तथा जीएमपी मानकों का पालन करना अनिवार्य है। दवाओं की गुणवत्ता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता करने वाले उत्पादकों के खिलाफ भविष्य में भी इसी प्रकार की सख्त नियामक कार्रवाई जारी रहेगी।

