
औरंगाबाद बेंच ने कहा— कड़ी कार्रवाई से पहले सुधार नोटिस और सुनवाई का अवसर देना जरूरी
मुंबई। बॉम्बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने छत्रपति संभाजीनगर में कई दूध सप्लायरों और विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित करने के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफ़डीए) के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने प्रथम दृष्टया पाया कि कार्रवाई के दौरान खाद्य सुरक्षा कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। जस्टिस एस.जी.चपलगांवकर ने प्रभावित दूध सप्लायरों और विक्रेताओं की ओर से दायर अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। एफ़डीए ने जुलाई की शुरुआत में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के कथित उल्लंघन को लेकर याचिकाकर्ताओं के लाइसेंस निलंबित किए थे।
सुधार का मौका दिए बिना लाइसेंस निलंबित करने पर सवाल
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि एफ़डीए के निरीक्षण के दौरान सामने आई कमियां मामूली प्रकृति की थीं। इसके बावजूद उन्हें सुधार का अवसर दिए बिना सीधे लाइसेंस निलंबित कर दिए गए। अदालत ने पाया कि अधिकांश मामलों में निरीक्षण के दौरान दर्ज कमियां प्रथम दृष्टया इतनी गंभीर नहीं थीं कि दूध प्रसंस्करण इकाइयों को बंद करने अथवा लाइसेंस तत्काल निलंबित करने जैसी कठोर कार्रवाई आवश्यक हो। बेंच ने कहा कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम की धारा 32 के तहत निर्धारित प्रक्रिया में सुधार नोटिस का प्रावधान है। अदालत को प्रथम दृष्टया एफ़डीए की कार्रवाई इस प्रक्रिया के अनुरूप नहीं दिखाई दी।
एफ़डीए को नोटिस, निलंबन आदेश पर अंतरिम रोक
हाई कोर्ट ने एफ़डीए को नोटिस जारी करते हुए संबंधित लाइसेंस निलंबन आदेशों पर अंतरिम रोक लगा दी। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया विवादित आदेशों के तहत की गई कार्रवाई अधिनियम की धारा 32 में निर्धारित प्रक्रिया के दायरे से बाहर दिखाई देती है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता राहुल कार्पे ने दलील दी कि लाइसेंस निलंबित करने से पहले कारण बताओ नोटिस जारी करना और संबंधित पक्ष को सुनवाई का अवसर देना आवश्यक था। दूसरी ओर, सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि एफ़डीए अधिकारी के पास कुछ परिस्थितियों में बिना पूर्व सूचना के लाइसेंस निलंबित करने का अधिकार है। हालांकि, अदालत ने कहा कि मौजूदा मामलों में प्रथम दृष्टया ऐसी कोई आपात परिस्थिति नजर नहीं आती, जिसके आधार पर सुधार नोटिस दिए बिना और संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर प्रदान किए बिना तत्काल इतनी कठोर कार्रवाई की आवश्यकता थी। फिलहाल हाई कोर्ट की अंतरिम रोक से प्रभावित दूध सप्लायरों और विक्रेताओं को राहत मिली है। मामले में आगे की सुनवाई के दौरान एफ़डीए की कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से विचार किया जाएगा।

