
मुख्यमंत्री फडणवीस ने उच्चस्तरीय समिति बनाने के दिए निर्देश, पारदर्शिता, गुणवत्ता और नवाचार पर रहेगा विशेष जोर
मुंबई। महाराष्ट्र सरकार राज्य की सरकारी निविदा (टेंडर) और खरीद प्रक्रिया में व्यापक सुधार करने जा रही है। बुधवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सरकारी खरीद व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह, गुणवत्तापूर्ण और नवाचार आधारित बनाने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं। मंत्रालय में आयोजित बैठक में उन्होंने कहा कि नई समिति मौजूदा निविदा नियमों की समीक्षा कर आवश्यक बदलाव सुझाएगी, जिसके बाद संशोधित नियमावली जारी की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य की टेंडर प्रक्रिया में केवल पूर्व अनुभव और वित्तीय पात्रता को ही आधार नहीं बनाया जाएगा, बल्कि तकनीकी क्षमता, नवाचार, दक्ष मानव संसाधन, गुणवत्ता और परिणाम आधारित मूल्यांकन को भी प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने गुणवत्ता एवं लागत के संतुलन पर आधारित क्यूसीबीएस (QCBS) प्रणाली को अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने तथा परियोजना की पूरी जीवन अवधि की लागत को ध्यान में रखकर निर्णय लेने पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि महाटेंडर पोर्टल को विभिन्न सरकारी विभागों से जोड़ा जाए, ताकि किसी ठेकेदार द्वारा अन्य विभागों में किए जा रहे कार्यों की जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हो। साथ ही, एक ही ठेकेदार को अत्यधिक काम मिलने की स्थिति रोकने के लिए आवश्यक तकनीकी सुधार किए जाएं। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि स्टार्टअप, नए उद्यमियों और भारतीय कंपनियों को अधिक अवसर देने के लिए निविदा नीति में आवश्यक बदलाव किए जाएं। सरकार को कुछ हद तक जोखिम स्वीकार कर सक्षम भारतीय कंपनियों को अवसर देना चाहिए। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर की खरीद प्रणाली का अध्ययन कर उसे राज्य की आधारभूत संरचना परियोजनाओं में लागू करने की भी आवश्यकता बताई। बैठक में यह भी तय किया गया कि सेवा स्तर समझौते (SLA), मजबूत अनुबंध प्रबंधन, जोखिम प्रबंधन और परियोजनाओं की सतत निगरानी पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि विवाद और न्यायालयीन मामलों में कमी लाई जा सके। सरकार केवल अत्यधिक तकनीकी शर्तें लगाने के बजाय अपेक्षित परिणाम स्पष्ट करे और उद्योग जगत को नवाचार आधारित समाधान प्रस्तुत करने का अवसर दे। बैठक में टूल टेक के अध्यक्ष अतुल खन्ना ने सरकारी खरीद नीति, महाटेंडर प्रणाली, अनुबंध प्रबंधन, प्री-आरएफपी, अर्ली कॉन्ट्रैक्टर इन्वॉल्वमेंट, डिलिवरेबल आधारित अनुबंध और मानकीकृत निविदा प्रणाली पर विस्तृत प्रस्तुति दी। विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी मौजूदा निविदा प्रक्रिया में सुधार के लिए अपने सुझाव प्रस्तुत किए।



