
मुंबई। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के एच/पूर्व विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। सांताक्रुज पूर्व स्थित नेहरू रोड पर ब्यूटीफिकेशन के नाम पर लाखों रुपये खर्च कर लगाई गईं स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी रहती हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब इन लाइटों का इस्तेमाल ही नहीं हो रहा है तो मुंबईकरों के टैक्स के लाखों रुपये खर्च कर इन्हें लगाया ही क्यों गया? स्थानीय रहिवासियों का आरोप है कि नेहरू रोड पर पहले से ही स्ट्रीट लाइटें मौजूद हैं। इसके बावजूद ब्यूटीफिकेशन के नाम पर अलग से नई स्ट्रीट लाइटें लगाने पर लाखों रुपये खर्च किए गए, लेकिन इन लाइटों को शायद ही कभी जलते देखा गया हो। इससे पूरे काम की उपयोगिता, योजना और उस पर खर्च की गई सार्वजनिक धनराशि को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक राहगीर ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि बीएमसी प्रशासन को यह जवाब देना चाहिए कि मुंबईकरों के खून-पसीने की कमाई से प्राप्त टैक्स के पैसे को ऐसे कार्यों पर खर्च करना कितना उचित है, जिनका नागरिकों को कोई प्रत्यक्ष लाभ ही नहीं मिल रहा। स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया कि विकास और सौंदर्यीकरण के नाम पर अनावश्यक कार्यों पर सार्वजनिक धन खर्च किया जा रहा है और जिम्मेदार अधिकारी जवाबदेही से बच रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब नेहरू रोड पर पहले से स्ट्रीट लाइटों की व्यवस्था मौजूद थी, तो अलग से नई लाइटें लगाने की आवश्यकता क्यों पड़ी? नई लाइटों को लगाने में कुल कितनी धनराशि खर्च की गई? कार्य किस ठेकेदार या एजेंसी को दिया गया? लाइटों के रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी है? और यदि ये लाइटें नियमित रूप से चालू ही नहीं होतीं, तो संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई?



