यातायात पुलिस और परिवहन विभाग की संयुक्त कार्रवाई, नियमों के उल्लंघन पर 5.50 लाख रुपये का शमन शुल्क अधिरोपित

झांसी, उत्तर प्रदेश। स्कूली बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए झांसी यातायात पुलिस एवं परिवहन विभाग (एआरटीओ) द्वारा स्कूली बच्चों के परिवहन में लगे वाहनों के खिलाफ तीन दिवसीय विशेष संयुक्त सघन चेकिंग अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान नियमों और परमिट की शर्तों का उल्लंघन पाए जाने पर 18 ईको वाहन, तीन ऑटो और एक बस सहित कुल 22 वाहनों को सीज किया गया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक झांसी बीबीजीटीएस मूर्ति के निर्देशन में 8 जुलाई 2026 से 10 जुलाई 2026 तक चलाए गए इस विशेष अभियान का उद्देश्य स्कूली बच्चों के परिवहन में इस्तेमाल होने वाले वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था की जांच करना और यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित कराना था। यह अभियान एआरटीओ हेमचंद गौतम, एआरटीओ सुरेन्द्र अग्रवाल और प्रभारी निरीक्षक यातायात मुकेश कुमार सिंह के संयुक्त नेतृत्व में संचालित किया गया।
अभियान के दौरान यातायात पुलिस और परिवहन विभाग की संयुक्त टीमों ने स्कूली बच्चों को लाने और ले जाने में इस्तेमाल किए जा रहे ऑटो, ईको वैन और बसों की सघन जांच की। जांच के दौरान वाहनों के परमिट, फिटनेस, निर्धारित यात्री क्षमता, ओवरलोडिंग और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े अन्य आवश्यक मानकों की गहनता से पड़ताल की गई। चेकिंग अभियान में नियमों और परमिट की शर्तों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई। जांच में अनियमितता पाए जाने पर 18 ईको वाहन, तीन ऑटो और एक बस को सीज कर दिया गया। इसके अतिरिक्त अन्य यातायात एवं परिवहन नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के खिलाफ नियमानुसार चालान की कार्रवाई की गई। अभियान के दौरान कुल 5 लाख 50 हजार रुपये का शमन शुल्क अधिरोपित किया गया। पुलिस और परिवहन विभाग की इस संयुक्त कार्रवाई से स्कूली बच्चों को असुरक्षित तरीके से लाने और ले जाने वाले वाहन संचालकों में हड़कंप मच गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि स्कूली बच्चों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। बच्चों के परिवहन में लगे वाहनों को परमिट, फिटनेस, निर्धारित क्षमता और अन्य सभी सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य है। यातायात पुलिस और परिवहन विभाग द्वारा चलाए गए इस विशेष अभियान का उद्देश्य नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर कार्रवाई करने के साथ वाहन संचालकों को स्कूली बच्चों की सुरक्षा के प्रति जिम्मेदार और जागरूक बनाना भी रहा।



