
कम स्थान में तैयार होगा घना वन, पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
देवेश प्रताप सिंह राठौर/ झांसी, उत्तर प्रदेश। विश्वविद्यालय परिसर को हरा-भरा बनाने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मियावाकी वन की स्थापना की पहल की गई है। इस अभियान के तहत विश्वविद्यालय परिसर में जापानी मियावाकी पद्धति से घना वन विकसित किया जाएगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मुकेश पांडेय ने की और उनके द्वारा वृक्षारोपण कर अभियान का शुभारंभ किया गया। मियावाकी पद्धति के माध्यम से कम स्थान में अधिक घने और तेजी से विकसित होने वाले वन तैयार किए जाते हैं। इस तकनीक से लगाए गए पौधे पारंपरिक वृक्षारोपण की तुलना में तेजी से बढ़ते हैं। मियावाकी वन वायु प्रदूषण को कम करने, पर्यावरण संतुलन बनाए रखने और जैव विविधता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम के दौरान कुलपति प्रो. मुकेश पांडेय ने पौधारोपण करते हुए विश्वविद्यालय परिवार को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मियावाकी वन आने वाली पीढ़ियों के लिए एक हरित विरासत साबित होगा। वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को देखते हुए इस प्रकार के प्रयास अत्यंत आवश्यक हैं। कुलपति ने छात्र-छात्राओं से अपील की कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल और संरक्षण की जिम्मेदारी लेना भी आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक होकर अन्य लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करने का आह्वान किया। कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. विनीत कुमार ने मियावाकी पद्धति की विशेषताओं की जानकारी देते हुए बताया कि इस तकनीक से पौधों का विकास सामान्य पद्धति की तुलना में तीन गुना तेजी से होता है और मियावाकी वन अधिक मात्रा में कार्बन अवशोषित करने में सहायक होते हैं। उन्होंने बताया कि अभियान के अंतर्गत सैकड़ों देशी प्रजातियों के फलदार, छायादार और औषधीय पौधे लगाए गए हैं। इन पौधों के विकसित होने से विश्वविद्यालय परिसर में हरियाली बढ़ने के साथ पर्यावरण और जैव विविधता के संरक्षण में भी सहायता मिलेगी। कार्यक्रम में कुलसचिव ज्ञानेंद्र कुमार, वित्त अधिकारी प्रमोद कुमार सिंह, कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. विनीत कुमार, सम्पत्ति अधिकारी प्रो. डी.के. भट्ट, फार्म मैनेजर डॉ. अवनीश दुबे और डॉ. हरपाल सिंह सहित कृषि विज्ञान संस्थान के शिक्षक, कर्मचारी, छात्र-छात्राएं एवं राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के स्वयंसेवक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम को सफल बनाने में कृषि विज्ञान संस्थान के शिक्षकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों और राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों का विशेष योगदान रहा। उपस्थित सभी लोगों ने पर्यावरण संरक्षण और लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल का संकल्प लिया।



