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आषाढ़ी वारी में श्रद्धालुओं की सेवा के लिए मुंबई से 40 से अधिक डॉक्टरों की टीम रवाना, 22 मेडिकल कैंप लगाए जाएंगे

मुंबई। आषाढ़ी एकादशी के अवसर पर पंढरपुर स्थित भगवान विट्ठल मंदिर तक पहुंचने वाली पारंपरिक वारी यात्रा में इस वर्ष भी श्रद्धालुओं की स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए मुंबई से 40 से अधिक डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की टीम रवाना हुई है। बारिश के मौसम में होने वाली इस कठिन पैदल यात्रा के दौरान यह टीम वारकरियों को निःशुल्क चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराएगी। चेंबूर की शेल कॉलोनी निवासी डॉ. अनुराधा मोहिते पिछले 34 वर्षों से लगातार वारी में चिकित्सा सेवा दे रही हैं। उन्होंने कहा, “मैं पिछले 34 वर्षों से हर साल वारी में शामिल होकर वारकरियों की सेवा कर रही हूं। वारकरियों की सेवा करना मेरे लिए भगवान विट्ठल की सेवा के समान है।” इस वर्ष भी वह लगभग दो सप्ताह तक चिकित्सा दल के साथ यात्रा करेंगी।मौली चैरिटेबल एंड मेडिकल ट्रस्ट द्वारा आयोजित ‘डॉक्टर डिंडी’ में इस वर्ष 430 से अधिक डॉक्टरों ने पंजीकरण कराया है। डॉक्टर अलग-अलग शिफ्टों में कार्य करेंगे, ताकि यात्रा मार्ग पर प्रतिदिन 40 से 50 डॉक्टर श्रद्धालुओं को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करा सकें। मुंबई से रवाना हुई टीम पहले आलंदी पहुंचेगी, जहां 9 जुलाई को संत ज्ञानेश्वर महाराज पालखी में शामिल होगी। इसके बाद यह यात्रा पुणे, सासवड, जेजुरी, लोनांद, फलटन, शेगांव और वाखरी होते हुए लगभग 200 किलोमीटर का सफर तय कर आषाढ़ी एकादशी पर पंढरपुर पहुंचेगी। मौली चैरिटेबल एंड मेडिकल ट्रस्ट के ट्रस्टी अरविंद भोसले ने बताया कि इस वर्ष येराला मेडिकल कॉलेज सहित तीन अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेज इस सेवा अभियान से जुड़े हैं। यात्रा मार्ग पर सात एम्बुलेंस तैनात की गई हैं, जिनमें दो विशेष रूप से हृदय रोग संबंधी आपातकालीन सेवाओं के लिए तैयार रखी गई हैं। इसके अलावा पूरे मार्ग पर 22 मेडिकल कैंप स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि चिकित्सा शिविरों में छोटी-मोटी सर्जरी के लिए मिनी ऑपरेशन थिएटर की व्यवस्था भी रहेगी। जिन मरीजों को विशेष उपचार की आवश्यकता होगी, उन्हें मार्ग में स्थित निकटवर्ती अस्पतालों में रेफर किया जाएगा। वाखरी में अंतिम चरण के दौरान अत्यधिक भीड़ होने के कारण विशेष स्वास्थ्य व्यवस्था की गई है, क्योंकि तब तक अधिकांश श्रद्धालु 20 दिनों से अधिक समय तक पैदल यात्रा कर चुके होते हैं। डॉ. अनुराधा मोहिते ने बताया कि वारी के दौरान बदलते मौसम और लगातार पैदल चलने के कारण सांस संबंधी संक्रमण, अत्यधिक थकान, दूषित भोजन से होने वाली बीमारियां, पैरों में चोट तथा अन्य स्वास्थ्य समस्याएं सबसे अधिक देखने को मिलती हैं। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में 50 वर्ष से अधिक आयु के श्रद्धालु तथा 80 वर्ष तक के वरिष्ठ नागरिक भी वारी में शामिल होते हैं, इसलिए चिकित्सा सेवाओं का महत्व और बढ़ जाता है। गौरतलब है कि आषाढ़ी एकादशी, जिसे देवशयनी एकादशी भी कहा जाता है, भगवान विष्णु के चार माह की योगनिद्रा में प्रवेश का प्रतीक मानी जाती है। इस पावन अवसर पर हर वर्ष देशभर से लाखों श्रद्धालु भगवान विट्ठल के दर्शन के लिए पंढरपुर पहुंचते हैं।

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