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बाल संरक्षण व्यवस्था की होगी सख्त समीक्षा, 15 जुलाई तक सभी जिलाधिकारियों से मांगी रिपोर्ट

बाल अधिकार संरक्षण आयोग का निर्देश; बाल गृह, POCSO, बाल विवाह, बाल श्रम और दत्तक प्रक्रिया समेत पूरी व्यवस्था की होगी जांच

मुंबई। महाराष्ट्र राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने राज्य के सभी जिलाधिकारियों एवं जिला बाल संरक्षण कक्ष के अध्यक्षों को 15 जुलाई 2026 तक जिले की बाल संरक्षण व्यवस्था का विस्तृत और वस्तुनिष्ठ प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह रिपोर्ट केवल विभागीय जानकारी के आधार पर नहीं, बल्कि जिलाधिकारी स्वयं सभी तथ्यों का सत्यापन कर तैयार करेंगे। आयोग ने निर्देश दिया है कि रिपोर्ट में जिले के सभी पंजीकृत और अपंजीकृत बाल देखभाल संस्थानों की स्थिति, उनकी वैधता, भवन एवं अग्नि सुरक्षा व्यवस्था, बाल कल्याण समिति की कार्यप्रणाली, जिला बाल संरक्षण कक्ष की कार्यक्षमता, विशेष बाल पुलिस इकाई, जिला निरीक्षण समिति, दत्तक ग्रहण प्रक्रिया, फॉस्टर केयर, स्पॉन्सरशिप और बाल संगोपन योजनाओं के क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी शामिल की जाए। इसके अलावा बाल विवाह निषेध, बाल श्रम उन्मूलन, बाल भिक्षावृत्ति पुनर्वास, बच्चों के यौन शोषण (POCSO) से जुड़े मामलों की स्थिति, पीड़ित बच्चों के लिए सपोर्ट पर्सन की नियुक्ति तथा जिला, तहसील, ग्राम और वार्ड स्तर पर गठित बाल संरक्षण समितियों के कार्यों की भी विस्तृत समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। आयोग ने कहा कि बाल न्याय (बच्चों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 27 और धारा 106 के तहत जिला दंडाधिकारी एवं जिला बाल संरक्षण कक्ष के अध्यक्ष के रूप में जिलाधिकारियों की यह वैधानिक जिम्मेदारी है कि वे जिले की बाल संरक्षण व्यवस्था की नियमित निगरानी करें। इसी जिम्मेदारी के तहत आवश्यक सिफारिशों सहित विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्राप्त रिपोर्टों का परीक्षण करने के बाद आवश्यकता पड़ने पर संबंधित जिलों का प्रत्यक्ष निरीक्षण, सुनवाई तथा राज्य सरकार को आवश्यक सिफारिशें भेजी जाएंगी। यदि निर्धारित समय सीमा तक रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई तो उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आयोग का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य राज्य के प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित, सम्मानजनक और बाल-अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराना तथा बाल संरक्षण प्रणाली को अधिक प्रभावी, जवाबदेह और पारदर्शी बनाकर महाराष्ट्र को ‘बालस्नेही महाराष्ट्र’ के रूप में स्थापित करना है।

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