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मराठी भाषा के संवर्धन के लिए राज्य सरकार के बड़े कदम, लंदन में बनेगा वैश्विक मराठी भाषा केंद्र: मंत्री उदय सामंत

मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा मिलने के बाद उत्कृष्टता अध्ययन केंद्र का प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया; हर जिले में नियुक्त होंगे भाषा अधिकारी

मुंबई। मराठी भाषा को शास्त्रीय (अभिजात) भाषा का दर्जा मिलने के बाद राज्य सरकार ने उसके संरक्षण, संवर्धन और वैश्विक प्रसार के लिए कई महत्वाकांक्षी योजनाओं पर काम शुरू कर दिया है। उद्योग एवं मराठी भाषा मंत्री उदय सामंत ने गुरुवार को विधान परिषद में बताया कि उत्कृष्टता अध्ययन केंद्र (सेंटर ऑफ एक्सीलेंस) की स्थापना का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया गया है। मंजूरी की प्रतीक्षा के बावजूद राज्य सरकार ने मराठी भाषा के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों का क्रियान्वयन शुरू कर दिया है। विधान परिषद में नियम 92 के तहत हुई आधे घंटे की चर्चा का जवाब देते हुए मंत्री सामंत ने कहा कि मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने के लिए केंद्र सरकार का आभार है। उन्होंने बताया कि उत्कृष्टता अध्ययन केंद्र की स्थापना विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की प्रक्रिया के अनुसार होगी और इसके लिए आवश्यक प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जा चुका है। उन्होंने कहा कि केंद्र से निधि मिलने का इंतजार किए बिना राज्य सरकार ने विश्व मराठी सम्मेलन, वारकरी साहित्य सम्मेलन, बाल, युवा, महिला और श्रमिक साहित्य सम्मेलनों को प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया है। उदय सामंत ने बताया कि लंदन में छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम पर अंतरराष्ट्रीय वैश्विक मराठी भाषा केंद्र स्थापित किया जाएगा। इसके लिए महाराष्ट्र सरकार ने पांच करोड़ रुपये खर्च कर महाराष्ट्र मंडल की ऐतिहासिक इमारत खरीदी है। अगले दो महीनों में यह केंद्र शुरू हो जाएगा। उन्होंने बताया कि हिंदू हृदय सम्राट स्वर्गीय बालासाहेब ठाकरे की जन्मशताब्दी के अवसर पर नाशिक, छत्रपति संभाजीनगर, अमरावती, नागपुर, चंद्रपुर, पुणे, कोल्हापुर और रत्नागिरी में मराठी भाषा विकास केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा राज्य के प्रत्येक जिले में अलग जिला भाषा अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे, जिसकी प्रक्रिया अगले एक महीने में पूरी कर ली जाएगी। मंत्री सामंत ने बताया कि मुंबई में बन रहे मराठी भाषा भवन का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है और इसे दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, ऐरोली में 34 करोड़ रुपये की लागत से भाषा भवन का उपकेंद्र भी बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के साहित्यकारों की रचनाओं को विभिन्न भाषाओं में पहुंचाने के लिए स्वर्गीय यशवंतराव चव्हाण अनुवाद समिति को फिर से शुरू किया जाएगा। साथ ही, ज्ञानेश्वरी, तुकाराम गाथा, निवृत्तीनाथ और निळोबाराय के साहित्य के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए सरकार आर्थिक सहायता उपलब्ध करा रही है। उदय सामंत ने बताया कि मराठी भाषा को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के उद्देश्य से 75 अंतरराष्ट्रीय मराठी मंच स्थापित किए जा रहे हैं, जिनमें से 39 मंच पहले ही कार्यरत हो चुके हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि जापान में आयोजित वर्ल्ड एक्सपो के समापन समारोह में ‘जय जय महाराष्ट्र’ गीत के माध्यम से मराठी संस्कृति का भव्य प्रदर्शन किया गया। मंत्री ने कहा कि गैर-मराठी नागरिक भी आसानी से मराठी सीख सकें, इसके लिए परिवहन विभाग के सहयोग से विशेष अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि राज्य सरकार मराठी भाषा के संरक्षण, संवर्धन और वैश्विक प्रचार-प्रसार के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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