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जाति सत्यापन में ब्लॉकचेन और एआई का होगा इस्तेमाल, प्रक्रिया बनेगी पूरी तरह ऑनलाइन: मुख्यमंत्री फडणवीस

आदिवासी योजनाओं की आय सीमा बढ़ाने, पारधी समाज के लिए विशेष शिविर और लंबित पद भरने के दिए निर्देश

मुंबई। महाराष्ट्र में अनुसूचित जनजाति (एसटी) जाति वैधता प्रमाणपत्र की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में राज्य सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। गुरुवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने निर्देश दिए हैं कि जाति सत्यापन प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन किया जाए तथा ब्लॉकचेन तकनीक के माध्यम से सभी जाति वैधता प्रमाणपत्रों की सुरक्षित डिजिटल सत्यापन प्रणाली विकसित की जाए। साथ ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित व्यवस्था के जरिए डुप्लीकेट आवेदनों की पहचान, दस्तावेजों की प्रारंभिक जांच और सत्यापन प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जाए। मुख्यमंत्री गुरुवार को विधानभवन में आयोजित महाराष्ट्र राज्य जनजाति सलाहकार परिषद की 52वीं बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में आदिवासी विकास मंत्री डॉ. अशोक उईके, चिकित्सा शिक्षा मंत्री नरहरी झिरवाल सहित विभिन्न जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि आदिवासी विकास, वन और राजस्व विभाग संयुक्त रूप से पारधी समाज के लिए विशेष शिविर आयोजित कर आवश्यक प्रमाणपत्र उपलब्ध कराएं। उन्होंने अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या के अनुपात में आदिवासी उपयोजना के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध कराने हेतु वित्त विभाग के साथ समन्वय स्थापित करने के भी निर्देश दिए। फडणवीस ने कहा कि आदिवासी विद्यार्थियों को अधिक से अधिक सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके, इसके लिए आदिवासी विकास विभाग की शैक्षणिक एवं कल्याणकारी योजनाओं में निर्धारित आय सीमा की समीक्षा कर उसे बढ़ाकर कम से कम चार लाख रुपये वार्षिक करने की प्रक्रिया शुरू की जाए। उन्होंने अनुसूचित जनजाति प्रमाणपत्र सत्यापन कानून में आवश्यक संशोधनों में तेजी लाने, परियोजना अधिकारियों के रिक्त पद भरने, न्यायालयीन मामलों के लिए विशेष विधि विशेषज्ञ नियुक्त करने तथा प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के लिए संबंधित विभागों को समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए। साथ ही आदिवासी विकास विभाग से अन्य विभागों को मिलने वाले अनुदान और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी के लिए राज्य एवं जिला स्तर पर मजबूत तंत्र विकसित करने पर भी जोर दिया। मुख्यमंत्री ने वनाधिकार कानून के प्रभावी क्रियान्वयन, वन संरक्षण और आदिवासियों की आर्थिक उन्नति के लिए मिशन मोड में कार्य करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि बांध क्षेत्रों में मत्स्य व्यवसाय और नई योजनाओं में स्थानीय आदिवासियों को प्राथमिकता दी जाए। इसके अलावा बांस, तेंदूपत्ता और आपटा जैसे लघु वनोपज पर ग्रामसभाओं के अधिकारों की समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए। फडणवीस ने कहा कि आदिवासी समाज के सर्वांगीण विकास के लिए तकनीक आधारित, पारदर्शी और परिणामोन्मुख प्रशासन विकसित करना सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए सामान्य प्रशासन विभाग और आदिवासी विकास विभाग को समन्वय के साथ कार्य करते हुए सभी लंबित मामलों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करना होगा। उन्होंने आदिवासी विभाग के रिक्त पद शीघ्र भरने तथा विभिन्न विभागों द्वारा संचालित आदिवासी कल्याण योजनाओं की प्रभावी निगरानी के लिए सक्षम नियंत्रण प्रणाली विकसित करने के भी निर्देश दिए।

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