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₹1,445 करोड़ की महालक्ष्मी मंदिर विकास योजना का शुभारंभ: अमित शाह और फडणवीस की मौजूदगी में महालक्ष्मी मंदिर परिसर के भव्य विकास का श्रीगणेश

कोल्हापुर। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की उपस्थिति में शनिवार को करवीर निवासिनी श्री महालक्ष्मी मंदिर (अंबाबाई मंदिर) के संरक्षण, संवर्धन और परिसर विकास से संबंधित 1,445.97 करोड़ रुपए की महत्वाकांक्षी विकास योजना का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे सहित राज्य सरकार के कई मंत्री, जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम से पूर्व अमित शाह ने अपनी पत्नी के साथ मंदिर में दर्शन एवं विधिवत पूजा-अर्चना की तथा ‘रामाचा पार’ में उत्सव मूर्ति का पूजन करने के बाद विभिन्न विकास कार्यों की आधारशिला का अनावरण किया। करीब एक हजार वर्ष से अधिक प्राचीन करवीर निवासिनी श्री महालक्ष्मी मंदिर भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक माना जाता है और इसकी हेमाड़पंथी स्थापत्य शैली, समृद्ध धार्मिक परंपरा तथा ऐतिहासिक महत्व देश-विदेश के श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत इस व्यापक विकास योजना का उद्देश्य मंदिर की प्राचीन विरासत को संरक्षित रखते हुए श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधाओं का विकास करना है। योजना के तहत मंदिर परिसर का सौंदर्यीकरण, मूल मंदिर का संरक्षण एवं मरम्मत, नगर प्रदक्षिणा मार्ग का विकास, आसपास स्थित 41 छोटे-बड़े मंदिरों का संवर्धन तथा आधुनिक आधारभूत सुविधाओं का निर्माण किया जाएगा। राज्य मंत्रिमंडल ने 6 मई 2025 को इस परियोजना को मंजूरी दी थी। प्रथम चरण में 143.90 करोड़ रुपए के कार्य स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें पुरातत्व विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार मूल मंदिर संरक्षण, विद्युतीकरण, सीसीटीवी नेटवर्क और आधुनिक प्रकाश व्यवस्था शामिल है। वर्तमान में मूल मंदिर संरक्षण पर 32.96 करोड़ रुपए तथा सुरक्षा एवं प्रकाश व्यवस्था पर 23.05 करोड़ रुपए के कार्य प्रगति पर हैं। तीन चरणों में क्रियान्वित होने वाली इस योजना के अंतर्गत दर्शन मंडप, अन्नछत्र, वेद पाठशाला, बहुउद्देशीय सभागार, सूचना केंद्र, प्राथमिक उपचार केंद्र, पुलिस स्टेशन, सुरक्षा चौकियां, शौचालय ब्लॉक, चप्पल स्टैंड, दुकानें, एम्फीथिएटर, भोजनालय और बड़े पैमाने पर वाहन पार्किंग जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। परियोजना के लिए कुल 28,058 वर्गमीटर भूमि का मूल्यांकन किया गया है, जिसमें निजी भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी तेज़ी से जारी है। सरकार का मानना है कि इस परियोजना से न केवल श्रद्धालुओं को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि कोल्हापुर की धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन पहचान भी और मजबूत होगी। साथ ही धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने से स्थानीय व्यापार, रोजगार और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी। केंद्र और राज्य सरकार ने इस योजना को विरासत संरक्षण और आधुनिक विकास के संतुलित मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया है, जिससे महालक्ष्मी मंदिर परिसर की ऐतिहासिक गरिमा सुरक्षित रखते हुए भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप सुविधाओं का विस्तार किया जा सकेगा।

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