
मुंबई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि कोयला गैसीफिकेशन (Coal Gasification) विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला है और ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने की दिशा में यह एक निर्णायक परिवर्तन साबित होगा। केंद्र सरकार की नीतियों के अनुरूप राज्य सरकार भी अपनी नीतियां लागू कर रही है, ताकि विदर्भ को कोयला गैसीफिकेशन तथा उससे बनने वाले उत्पादों का प्रमुख राष्ट्रीय केंद्र बनाया जा सके। गुरुवार को बांद्रा स्थित ताज लैंड्स एंड होटल में केंद्रीय कोयला मंत्रालय द्वारा आयोजित ‘सरफेस कोल/लिग्नाइट गैसीफिकेशन प्रमोशन रोड शो’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कोयला गैसीफिकेशन का ऐतिहासिक संबंध मुंबई से रहा है। वर्ष 1862 में बॉम्बे गैस कंपनी ने परेल में देश का शुरुआती कोयला गैसीफिकेशन प्रकल्प शुरू किया था। आज आधुनिक तकनीक के माध्यम से भारत इस क्षेत्र में नई छलांग लगाने की तैयारी कर रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को साकार करने के लिए ऊर्जा क्षेत्र में स्वावलंबन बेहद आवश्यक है। वर्तमान में भारत को तेल, गैस और अन्य ऊर्जा स्रोतों के आयात पर भारी विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है, जिससे अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ता है। ऐसे में स्वदेशी और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि भारत ने वर्ष 2030 तक 500 गीगावॉट स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसमें अब तक 283 गीगावॉट क्षमता हासिल की जा चुकी है। सौर, पवन और हरित हाइड्रोजन के साथ-साथ कोयला गैसीफिकेशन भी ऊर्जा सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनेगा। भारत के पास लगभग 400 अरब टन कोयले का विशाल भंडार है, जिसका उपयोग इथेनॉल, मिथेनॉल, यूरिया, विभिन्न रसायनों और कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन एंड स्टोरेज (CCUS) तकनीक के माध्यम से पर्यावरण-अनुकूल औद्योगिक विकास के लिए किया जा सकता है। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि केंद्र सरकार ने कोयला गैसीफिकेशन उद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए हजारों करोड़ रुपये की योजनाएं शुरू की हैं। महाराष्ट्र सरकार ने भी पूंजीगत अनुदान सहित कई रियायतें प्रदान करने वाली नीति लागू की है। विदर्भ में उपलब्ध विशाल कोयला भंडार और विकसित हो रही स्टील उद्योग श्रृंखला को देखते हुए महाराष्ट्र देश का ग्रीन स्टील और कोयला गैसीफिकेशन का प्रमुख केंद्र बन सकता है। उन्होंने जानकारी दी कि बीपीसीएल, कोल इंडिया, न्यू एरा क्लीनटेक, क्रेटा एनर्जी और अदानी समूह जैसी कंपनियों ने इस क्षेत्र में निवेश की प्रक्रिया शुरू कर दी है। परियोजनाओं के लिए लगभग 2,000 एकड़ भूमि उपलब्ध कराई गई है तथा ‘मैत्री’ पोर्टल के माध्यम से सभी आवश्यक अनुमतियां निर्धारित समयसीमा में प्रदान की जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने निवेशकों से इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश करने का आह्वान करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की समन्वित नीतियों से कोयला गैसीफिकेशन उद्योग को नई गति मिलेगी। उन्होंने कहा, “कोयले को केवल कोयला मत समझिए; सही तकनीक और सही अवसर मिलने पर वही कोहिनूर साबित हो सकता है।” उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विदर्भ को इस उद्योग का राष्ट्रीय केंद्र बनाकर महाराष्ट्र देश के औद्योगिक विकास में अग्रणी भूमिका निभाएगा। इस अवसर पर केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने कहा कि कोयला गैसीफिकेशन भारत की ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक मजबूती और औद्योगिक प्रगति का अगला बड़ा अध्याय है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ऊर्जा क्षेत्र में हुए सुधारों के बाद अब यह नई क्रांति साबित होगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने पहली बार इस क्षेत्र के लिए बड़े पैमाने पर प्रोत्साहन योजना शुरू की है, जिससे निवेश, उत्पादन और रोजगार में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। केंद्रीय राज्य मंत्री सतीशचंद्र दुबे ने बताया कि केंद्र सरकार ने कोयला और लिग्नाइट गैसीफिकेशन को बढ़ावा देने के लिए 37,500 करोड़ रुपये की ऐतिहासिक प्रोत्साहन योजना मंजूर की है। वर्ष 2030 तक 100 मिलियन टन कोयला गैसीफिकेशन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इससे मिथेनॉल, अमोनिया, यूरिया और अन्य रसायनों के आयात पर निर्भरता कम होगी, निवेश बढ़ेगा और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित होंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि देश का पहला बड़ा कोयला गैसीफिकेशन प्रकल्प महाराष्ट्र में शुरू होगा और यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।



