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योग भारत की विश्व को सबसे अनमोल देन, शरीर-मन-आत्मा के संतुलन का माध्यम: मंत्री जयकुमार रावल

मुंबई। योग भारत की ओर से विश्व को दी गई सबसे मूल्यवान देन है। यह केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित करने वाली जीवनशैली है। यह विचार महाराष्ट्र के पणन एवं राजशिष्टाचार मंत्री जयकुमार रावल ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 के उपलक्ष्य में विभिन्न देशों के महावाणिज्यदूतों और मानद वाणिज्यदूतों के लिए आयोजित विशेष योग सत्र के उद्घाटन अवसर पर व्यक्त किए। राजशिष्टाचार विभाग और कैवल्यधाम योग संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में मरीन ड्राइव स्थित संस्थान के सभागार में आयोजित इस विशेष योग सत्र का उद्घाटन मंत्री जयकुमार रावल ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक शंखनाद से हुई। इसके बाद कैवल्यधाम के ट्रस्टी निवित श्रीवास्तव ने मंत्री रावल का स्वागत किया। इस अवसर पर स्वामी कुवलयानंद, जो भारत के सबसे पुराने योग अनुसंधान एवं शिक्षण संस्थानों में से एक कैवल्यधाम के संस्थापक हैं, उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। अपने संबोधन में मंत्री रावल ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को मिली वैश्विक मान्यता भारत के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व के कारण योग को विश्व स्तर पर नई पहचान मिली है। योग में विभिन्न देशों, संस्कृतियों और परंपराओं को स्वास्थ्य, शांति और सुख जैसे साझा मूल्यों के माध्यम से जोड़ने की अद्भुत क्षमता है। उन्होंने योग की वैज्ञानिक परंपरा के संरक्षण और प्रसार में कैवल्यधाम संस्थान के सौ वर्षों से अधिक समय से किए जा रहे योगदान की भी सराहना की। कार्यक्रम के दौरान कैवल्यधाम के विशेषज्ञ प्रशिक्षकों ने उपस्थित प्रतिनिधियों को विभिन्न योगासन और प्राणायाम का अभ्यास कराया तथा उनके स्वास्थ्य संबंधी लाभों की जानकारी दी। इस योग सत्र में युगांडा, अर्जेंटीना, न्यूज़ीलैंड, बांग्लादेश, यूनाइटेड किंगडम, जापान, फ्रांस, सिंगापुर, कनाडा और श्रीलंका समेत 26 देशों के महावाणिज्यदूत, वाणिज्यदूत, उच्चायुक्त और उनके प्रतिनिधि शामिल हुए। हर वर्ष 21 जून को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के संदर्भ में आयोजित इस कार्यक्रम ने विदेशी प्रतिनिधियों को भारतीय संस्कृति और योग परंपरा को निकट से समझने और अनुभव करने का अवसर प्रदान किया। उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए योग के वैश्विक प्रसार के लिए ऐसे आयोजनों को महत्वपूर्ण बताया।

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