
मुंबई। कॉमेडियन प्रणित मोरे के स्टैंड-अप शो में की गई “₹370 की बिरयानी” टिप्पणी को लेकर छिड़े विवाद के बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक ज़िम्मेदारी के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया है। उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की आज़ादी प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि इसका उपयोग बिना किसी सीमा या जवाबदेही के किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करता है, वहीं व्यक्ति की गरिमा और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए आवश्यक प्रतिबंधों का भी प्रावधान करता है। उनके अनुसार सार्वजनिक मंचों पर की जाने वाली टिप्पणियों का समाज पर व्यापक प्रभाव पड़ता है, इसलिए कलाकारों और वक्ताओं को अपने शब्दों के प्रति संवेदनशील और जिम्मेदार होना चाहिए। फडणवीस ने कहा कि स्टैंड-अप कॉमेडी मनोरंजन का एक लोकप्रिय माध्यम है और वे स्वयं भी ऐसे कार्यक्रम देखते हैं, लेकिन हास्य की प्रस्तुति शालीनता और मर्यादा की सीमाओं के भीतर होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मनोरंजन के नाम पर किसी व्यक्ति, समुदाय या पेशे की गरिमा को ठेस पहुंचाना उचित नहीं है। मुख्यमंत्री ने कलाकारों से अपील की कि वे अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उपयोग करते समय सामाजिक मूल्यों और अपने शब्दों के संभावित प्रभाव को ध्यान में रखें। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक कार्यक्रमों में प्रस्तुत सामग्री लाखों लोगों तक पहुंचती है, इसलिए उसमें संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का समावेश होना आवश्यक है। गौरतलब है कि यह विवाद कॉमेडियन प्रणित मोरे के एक स्टैंड-अप शो के वायरल वीडियो के बाद शुरू हुआ, जिसमें गुरुग्राम के एक दर्शक के साथ हुई बातचीत और कुछ टिप्पणियों को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। इसके बाद शो के दौरान हास्य की सीमाओं, दर्शकों के साथ संवाद की शैली और सार्वजनिक मंचों पर अभिव्यक्ति की नैतिक जिम्मेदारियों को लेकर व्यापक बहस छिड़ गई। इसी कार्यक्रम से जुड़ा एक अन्य वीडियो भी चर्चा में आया, जिसमें एक मेडिकल प्रोफेशनल द्वारा मेडिकल प्रशिक्षण के दौरान शव परीक्षण से संबंधित टिप्पणी किए जाने पर सोशल मीडिया पर आलोचना हुई। आलोचकों का कहना था कि ऐसी टिप्पणियां शरीर दान करने वालों और चिकित्सा पेशे की गरिमा के अनुरूप नहीं थीं। विवाद के बीच मुख्यमंत्री की टिप्पणी ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक जवाबदेही के बीच संतुलन को लेकर चल रही बहस को नई दिशा दे दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विचार व्यक्त करने का अधिकार महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ दूसरों की गरिमा और संवेदनशीलता का सम्मान भी उतना ही आवश्यक है।



