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उल्हासनगर आयुक्त को RTO का नोटिस: सरकारी गाड़ी पर लगी बीकन लाइट को तत्काल हटाने के निर्देश

उल्हासनगर। कल्याण क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) ने 2 जून 2026 को उल्हासनगर नगर निगम के आयुक्त मनीषा आव्हाले को उनकी सरकारी गाड़ी पर कथित रूप से लगी लाल और नीली चमकने वाली बीकन लाइट को तत्काल हटाने के निर्देश देते हुए नोटिस जारी किया है। इस कार्रवाई के बाद एक बार फिर VIP संस्कृति और मोटर वाहन नियमों के पालन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। जानकारी के अनुसार, आयुक्त की सरकारी गाड़ी MH-05-FP-9445 पर लाल और नीली फ्लैशिंग लाइट लगी होने की शिकायत परिवहन विभाग के संज्ञान में आई थी। कल्याण के उप क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी आशुतोष बरकुल ने बताया कि केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के संशोधित प्रावधानों के तहत ऐसी बीकन लाइटों का उपयोग प्रतिबंधित है। पहले इस संबंध में मौखिक निर्देश दिए गए थे, लेकिन कथित तौर पर इसका उपयोग जारी रहने के कारण विभाग को औपचारिक नोटिस जारी करना पड़ा। सूत्रों के अनुसार, इससे पहले भी इसी वाहन पर लगी अनधिकृत फ्लैशिंग लाइट को लेकर आपत्ति जताई गई थी। इसके बावजूद हाल ही में एक आधिकारिक कार्यक्रम के दौरान वाहन पर फिर से बीकन लाइट दिखाई देने का दावा किया गया, जिसके बाद मामला चर्चा में आ गया। बताया जा रहा है कि कल्याण-डोंबिवली नगर निगम (KDMC) की एक महत्वपूर्ण बैठक में शामिल होने के दौरान भी आयुक्त के वाहन पर विवादित लाइट लगी होने की बात सामने आई। प्रत्यक्षदर्शियों के दावों के बाद परिवहन विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए नोटिस जारी किया।
2017 से लागू है बीकन लाइट पर प्रतिबंध
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने 1 मई 2017 से देशभर में मंत्रियों, नौकरशाहों और अन्य सरकारी अधिकारियों के वाहनों पर लाल बीकन लाइट के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया था। इस फैसले को VIP संस्कृति समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना गया था। वर्तमान नियमों के अनुसार केवल एम्बुलेंस, पुलिस वाहन, अग्निशमन वाहन और अन्य अधिकृत आपातकालीन सेवाओं से जुड़े वाहनों को ही विशेष परिस्थितियों में फ्लैशिंग लाइट के उपयोग की अनुमति है।
जवाबदेही और नियमों के पालन पर उठे सवाल
इस मामले ने सरकारी अधिकारियों की जवाबदेही और नियमों के समान अनुपालन को लेकर बहस छेड़ दी है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यातायात और परिवहन संबंधी नियम आम नागरिकों और सरकारी अधिकारियों पर समान रूप से लागू होते हैं। ऐसे में यदि किसी वरिष्ठ अधिकारी पर नियमों के उल्लंघन के आरोप लगते हैं, तो यह प्रशासनिक पारदर्शिता और जनविश्वास से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बन जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि VIP संस्कृति को समाप्त करने के लिए बनाए गए नियमों का पालन बिना किसी अपवाद के होना चाहिए। वहीं, परिवहन विभाग की इस कार्रवाई को नियमों के सख्त अनुपालन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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