
देवेश प्रताप सिंह राठौर/झांसी, उत्तर प्रदेश। झांसी पुलिस ने एक बड़े साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में 19 बैंक खातों के माध्यम से ₹4.35 करोड़ से अधिक की साइबर ठगी की धनराशि के ट्रांजेक्शन सामने आए हैं। वहीं विदेशी चाइनीज वेबसाइट CESHI.TTTPYM.COM से जुड़े लगभग ₹38 करोड़ के वित्तीय लेन-देन और 114 बैंक खातों की जानकारी भी पुलिस को मिली है।पुलिस ने कार्रवाई के दौरान बाइनेंस प्लेटफॉर्म पर 529 USDT फ्रीज किए हैं, जबकि लगभग 37,966 USDT यानी करीब ₹37.20 लाख के डिजिटल ट्रांजेक्शन का भी खुलासा हुआ है। इसके अलावा आईडीबीआई बैंक खाते में ₹43,487 की राशि होल्ड कराई गई है। जांच में यह भी सामने आया कि साइबर ठगी से प्राप्त रकम को USDT में बदलकर विभिन्न डिजिटल वॉलेट्स में ट्रांसफर किया जा रहा था।यह कार्रवाई अपर पुलिस महानिदेशक कानपुर जोन अनुपम कुलश्रेष्ठ, पुलिस महानिरीक्षक झांसी परिक्षेत्र आकाश कुलहरि तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बीबीजीटीएस मूर्ति के निर्देशन में की गई। थाना प्रेमनगर पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाकर गुलाम गौस खां मार्ग कच्चे पुल के पास से 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया।गिरफ्तार आरोपियों में रागिब अहमद, सनी अमराया, सोहिल खान, अनुभव सिंह, दानिश खान उर्फ नूर, सौरभ विश्वकर्मा और देवेश कुमार गौतम शामिल हैं। आरोपियों के कब्जे से 8 मोबाइल फोन, 1 सिम कार्ड, 1 चेकबुक और 4 एटीएम कार्ड बरामद किए गए। मोबाइल और डिजिटल उपकरणों की जांच में साइबर फ्रॉड, बैंक खातों के दुरुपयोग, यूपीआई आईडी निर्माण, नेट बैंकिंग संचालन और USDT लेन-देन से जुड़े अहम डिजिटल साक्ष्य मिले हैं।पुलिस के अनुसार गिरोह का मुख्य संचालक ध्रुव निवासी इंदौर बताया जा रहा है, जो चाइनीज वेबसाइटों और ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म के जरिए साइबर ठगी का नेटवर्क संचालित करता था। आरोपी रागिब अहमद इंडोनेशिया के सिम कार्ड का इस्तेमाल कर विभिन्न बैंक खातों की यूपीआई और नेट बैंकिंग तैयार करता था और उनकी जानकारी विदेशी व्हाट्सएप नंबरों के जरिए मुख्य संचालक तक पहुंचाई जाती थी।जांच में यह भी खुलासा हुआ कि गिरोह ऑनलाइन गेमिंग साइट्स जैसे 1BET और अन्य कैसीनो प्लेटफॉर्म के माध्यम से लोगों को अधिक मुनाफे का लालच देकर रिचार्ज और पॉइंट खरीदने के लिए प्रेरित करता था। साइबर ठगी से प्राप्त रकम अलग-अलग बैंक खातों में जमा कराई जाती थी। ₹500 से अधिक राशि वाले लेन-देन को गेमिंग प्लेटफॉर्म पर जीतने वाले खातों में भेज दिया जाता था, जिससे खातों पर फ्रीज या लियन लग जाए और वास्तविक आरोपियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाए। वहीं ₹500 से कम रकम वाले ट्रांजेक्शन अलग-अलग डिजिटल माध्यमों से आगे ट्रांसफर किए जाते थे।गिरफ्तारी और बरामदगी के आधार पर थाना प्रेमनगर में मुकदमा अपराध संख्या 214/2026 धारा 112(2) और 318(4) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया है। पुलिस अब इस अंतरराज्यीय और विदेशी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है।




