मुंबई। मुंबई क्राइम ब्रांच की एंटी-एक्सटॉर्शन सेल (AEC) ने एक बड़े ऑपरेशन के तहत मुंबई से तीन संदिग्ध आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि ये आरोपी शहर में तीन पिस्तौल पहुंचाने आए थे। शुरुआती जांच में सामने आया है कि बरामद हथियार कथित रूप से चीन में बने हैं और उन्हें नेपाल सीमा के रास्ते भारत में तस्करी कर लाया गया हो सकता है। शनिवार को पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान जशन प्रीत मंगल सिंह (24) और सुखविंदर चंद्रपाल (24) के रूप में हुई है, जो पटियाला के रहने वाले बताए गए हैं। तीसरे आरोपी अरबाज अनवर चौधरी (34) का संबंध झालावाड़ से है। पुलिस के अनुसार, पंजाब के दोनों आरोपियों पर हत्या सहित चार गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं, जबकि अरबाज चौधरी के खिलाफ 19 आपराधिक मामले दर्ज बताए जा रहे हैं। जांच एजेंसियों को यह भी जानकारी मिली है कि कुछ आरोपियों का संबंध पंजाब के सनाउर पुलिस स्टेशन में दर्ज अपराध संख्या 95/22 से भी हो सकता है। ट्रेन और सड़क मार्ग से मुंबई पहुंचे जांच में पता चला कि आरोपी हथियार लेकर पंजाब से मुंबई पहुंचे थे और सफर के दौरान ट्रेन तथा सड़क—दोनों माध्यमों का इस्तेमाल किया गया। मुंबई पहुंचने के बाद वे कथित तौर पर एक लॉज में ठहरे हुए थे। पुलिस के अनुसार, पंजाब और राजस्थान से आए आरोपियों की मुलाकात मुंबई में ही हुई थी। “मेड इन चाइना” पिस्तौलों ने बढ़ाई चिंता बरामद पिस्तौलों पर “मेड इन चाइना” होने का संदेह जताया गया है। जांचकर्ताओं का मानना है कि इन हथियारों को नेपाल सीमा के जरिए अवैध रूप से भारत में लाया गया हो सकता है। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि हथियारों की सप्लाई चेन में कौन-कौन शामिल है और इनके पीछे कौन सा बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है। बिश्नोई गैंग एंगल की भी जांच चूंकि आरोपी ऐसे क्षेत्रों से आते हैं जहां बिश्नोई गैंग का प्रभाव माना जाता है, इसलिए पुलिस इस एंगल की भी गंभीरता से जांच कर रही है। बिश्नोई गैंग पर पहले भी फिल्म इंडस्ट्री और हाई-प्रोफाइल हस्तियों को धमकियां देने के आरोप लगते रहे हैं। इसी वजह से जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या इन हथियारों का इस्तेमाल मुंबई में किसी बड़ी आपराधिक वारदात या किसी बॉलीवुड हस्ती को निशाना बनाने के लिए किया जाना था। मोबाइल डेटा और डिजिटल सबूत खंगाले जा रहे पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए हैं। जांचकर्ता अब कॉल रिकॉर्ड, चैट हिस्ट्री और अन्य डिजिटल डेटा का विश्लेषण कर रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि इस जांच से आगे चलकर हथियार तस्करी और संगठित अपराध से जुड़े और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। महानगरों में बढ़ती अवैध हथियारों की चुनौती विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय सीमा के जरिए छोटे हथियारों की तस्करी देश की सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। महानगरों में सक्रिय गैंग और संगठित अपराध नेटवर्क अब आधुनिक और विदेशी हथियारों तक पहुंच बनाने लगे हैं, जिससे सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ी हुई है। फिलहाल मुंबई क्राइम ब्रांच पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने और हथियारों के अंतिम खरीदार तक पहुंचने की कोशिश में जुटी हुई है।