
गरीब नगर को तोड़ा जा रहा, लेकिन बेहरामपाड़ा, नवपाड़ा, प्रभात कॉलोनी में बने अवैध निर्माणों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कब होगी कार्रवाई?
मुंबई। मुंबई में अवैध निर्माण कोई नई बात नहीं है। मुंबई में बने अवैध निर्माणों के लिए जितने अवैध निर्माणकर्ता जिम्मेदार हैं, उससे कहीं ज्यादा बृहन्मुंबई महानगरपालिका के अधिकारी भी जिम्मेदार हैं। लेकिन जब शासन-प्रशासन को उक्त भूखंड की जरूरत पड़ती है, तो अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की जाती है। लेकिन अधिकारियों को संरक्षण देकर दूसरे अवैध निर्माणों को संरक्षण देने का अवसर देना कितना सही है? जिसका ताजा उदाहरण बांद्रा पूर्व स्थित गरीब नगर है, जहां अवैध रूप से बनी सैकड़ों झोपड़ियों पर पश्चिम रेलवे की कार्रवाई की जा रही है। यह कार्रवाई इसलिए हो रही है क्योंकि उक्त भूखंड की जरूरत रेलवे को है। वहीं उसके बगल में बेहरामपाड़ा व नवपाड़ा है, जहां झोपड़ियां नहीं बल्कि अवैध आरसीसी इमारतें बनी हैं। बीएमसी अधिकारियों की सेटिंग के चलते बिना किसी परमिशन के बनी 3 आरसीसी इमारतों का मामला पिछले 4 वर्षों से कोर्ट में है और बीएमसी का लीगल विभाग उसे अवैध साबित करने में नाकाम साबित हो रहा है। यह कहना गलत नहीं होगा कि कोर्ट को सही जानकारी नहीं दी जा रही है। इन इमारतों को किसी भी प्रकार की अनुमति इमारत प्रस्ताव विभाग ने नहीं दी है। फिर भी बीएमसी का लीगल विभाग पिछले चार वर्षों से अवैध इमारतों को बचा रहा है, जो बीएमसी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान है। इसकी शिकायत तत्कालीन बीएमसी आयुक्त व अतिरिक्त आयुक्त तक हुई, लेकिन मानो सेटिंगबाजों के सामने पूरी प्रशासनिक व्यवस्था ने दम तोड़ दिया हो।यही नहीं, बीएमसी एच/पूर्व विभाग के अधिकारियों की नाकामी बांद्रा पूर्व स्थित बेहरामपाड़ा, नवपाड़ा व खेरवाड़ी के साथ-साथ सांताक्रूज पूर्व प्रभात कॉलोनी में बने तीन मंजिला मकानों को देखकर भी लगाई जा सकती है। जिस पर बीएमसी एच/पूर्व विभाग की तत्कालीन व वर्तमान सहायक आयुक्त के साथ-साथ क्षेत्रीय कनिष्ठ अभियंता भी पूरी तरह जिम्मेदार हैं। बीएमसी प्रशासन व महाराष्ट्र सरकार को ऐसे अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करनी ही होगी, जिससे झोपड़पट्टी मुक्त मुंबई का सपना साकार हो सके।





