मुंबई। महाराष्ट्र पर्यटन विकास महामंडल (MTDC) की ओर से सिंधुदुर्ग जिले के निवती रॉक क्षेत्र में भारतीय नौसेना की सेवानिवृत्त युद्धपोत “एक्स-आईएनएस गुलदार” को सफलतापूर्वक समुद्र तल पर स्थापित किया गया है। इसके साथ ही देश की सबसे महत्वाकांक्षी और अनोखी अंडरवॉटर पर्यटन परियोजनाओं में से एक साकार होने जा रही है। पर्यटन मंत्री शंभूराज देसाई ने कहा कि यह परियोजना भारत को वैश्विक समुद्री पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाएगी। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र पर्यटन विकास निगम (MTDC) और मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) के समन्वय से विकसित यह परियोजना भारत में पहली एकीकृत सबमरीन आधारित अनुभवात्मक पर्यटन पहल होगी। स्कूबा डाइविंग से लेकर अंडरवॉटर फोटोग्राफी तक मिलेगा अनोखा अनुभव परियोजना के तहत पर्यटकों को गाइडेड व्रेक डाइविंग, सबमरीन अनुभव, 12 मीटर तक “डिस्कवर स्कूबा डाइविंग”, प्रमाणित डाइवर्स के लिए 18 मीटर तक डाइविंग मिशन, 30 मीटर तक एडवांस डाइविंग अनुभव, अंडरवॉटर फोटोग्राफी और समुद्री शिक्षा व शोध जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। मंत्री शंभूराज देसाई ने कहा कि डाइविंग स्लॉट, सबमरीन बुकिंग और अन्य पर्यटन सुविधाओं की जानकारी जल्द ही MTDC के आधिकारिक माध्यमों से जारी की जाएगी। 39 वर्षों तक नौसेना की सेवा में रही थी युद्धपोत “एक्स-आईएनएस गुलदार” भारतीय नौसेना की “मगर” श्रेणी की लैंडिंग शिप टैंक (LST) युद्धपोत थी, जिसने लगभग 39 वर्षों तक देश की सेवा की। यह युद्धपोत 12 जनवरी 2024 को नौसेना से सेवानिवृत्त हुई थी। पोलैंड के ग्डिनिया शिपयार्ड में 30 दिसंबर 1985 को इसका उद्घाटन किया गया था। करीब 83.9 मीटर लंबी इस युद्धपोत का उपयोग सैनिकों और रसद परिवहन, उभयचर युद्ध अभियानों, तटीय सुरक्षा और नौसैनिक अभ्यासों में किया जाता था। 19 मई 2026 को इसे सिंधुदुर्ग तट के निवती रॉक क्षेत्र में लगभग 22 मीटर गहराई पर समुद्र तल में स्थापित किया गया। समुद्री जैव विविधता को भी मिलेगा बढ़ावा परियोजना के तहत युद्धपोत को समुद्र में उतारने से पहले पर्यावरणीय सफाई की गई। अब इसकी मजबूत स्टील संरचना कृत्रिम प्रवाल भित्ति (Artificial Reef) के रूप में विकसित होगी, जिससे समुद्री जैव विविधता, प्रवाल वृद्धि और मत्स्य संसाधनों को बढ़ावा मिलेगा। इस स्थान का चयन महाराष्ट्र मैरीटाइम बोर्ड और राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान द्वारा किए गए वैज्ञानिक अध्ययन के बाद किया गया। अध्ययन में यह प्रमाणित हुआ कि क्षेत्र में प्राकृतिक प्रवाल भित्तियां नहीं हैं और परियोजना से कोई प्रतिकूल पर्यावरणीय प्रभाव नहीं पड़ेगा। कोकण पर्यटन अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा लाभ इस परियोजना से सिंधुदुर्ग सहित पूरे कोकण क्षेत्र की पर्यटन अर्थव्यवस्था को बड़ा प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के कारण स्थानीय होटल, परिवहन, भोजनालय और पर्यटन सेवाओं से जुड़े व्यवसायों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी। साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और सहायक व्यवसायों के नए अवसर भी पैदा होंगे। वैश्विक व्रेक डाइविंग स्थलों से प्रेरित परियोजना यह परियोजना अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित USS Oriskany और ऑस्ट्रेलिया के HMAS Swan जैसे विश्वस्तरीय व्रेक डाइविंग स्थलों से प्रेरित है। अधिकारियों के अनुसार, यह भारत का पहला विश्वस्तरीय अंडरवॉटर म्यूजियम और कृत्रिम प्रवाल भित्ति पर्यटन उपक्रम होगा। MTDC ने देश-विदेश के पर्यटकों, स्कूबा डाइवर्स, समुद्री शोधकर्ताओं, छात्रों और फोटोग्राफरों को इस अनोखे अंडरवॉटर पर्यटन अनुभव के लिए आमंत्रित किया है।