मुंबई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सायप्रस के उद्योग समूहों से महाराष्ट्र में निवेश करने और उत्पादन, नवाचार तथा व्यापार के क्षेत्र में दीर्घकालिक साझेदारी विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र सरकार स्थिर, निर्णयक्षम और उद्योग-अनुकूल शासन देने के लिए प्रतिबद्ध है तथा वैश्विक साझेदारी का स्वागत करती है। गुरुवार को मुंबई के ताज महल पैलेस में आयोजित “सायप्रस-भारत बिजनेस फोरम” में मुख्यमंत्री फडणवीस ने यह बात कही। इस कार्यक्रम में निकोस क्रिस्टोडौलिडेस की विशेष उपस्थिति रही। कार्यक्रम में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के सह सचिव जय प्रकाश शिवहरे, फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) के उपाध्यक्ष विजय शंकर, भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के अध्यक्ष बी. थियागर्जन, सायप्रस चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष स्टाव्रोस स्टाव्रू तथा Invest Cyprus के अध्यक्ष इव्हजेनिअस इव्हजेनिऊ सहित कई उद्योग प्रतिनिधि उपस्थित थे। भारत-सायप्रस संबंधों को मिला नया आयाम मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि भारत और सायप्रस के संबंध केवल भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि लोकतंत्र, संप्रभुता और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व जैसे साझा मूल्यों पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 2025 की सायप्रस यात्रा के बाद दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई गति मिली है। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र आज 660 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था वाला राज्य बन चुका है और देश के औद्योगिक उत्पादन में लगभग 30 प्रतिशत तथा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में 40 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है। महाराष्ट्र में तेजी से बढ़ रहा बुनियादी ढांचा मुख्यमंत्री ने कहा कि मुंबई तेजी से वैश्विक वित्तीय केंद्र के रूप में विकसित हो रही है। राज्य में मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक, समृद्धि महामार्ग, नवी मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, मेट्रो नेटवर्क, लॉजिस्टिक पार्क और स्मार्ट सिटी जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर तेजी से काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र 93 गीगावॉट ऊर्जा उत्पादन क्षमता की ओर बढ़ रहा है, जिसमें 52 प्रतिशत ऊर्जा नवीकरणीय स्रोतों से प्राप्त होगी। साथ ही राज्य में इंटरनेशनल एजु सिटी, मेडी सिटी और जीसीसी सिटी जैसे वैश्विक स्तर के प्रोजेक्ट भी विकसित किए जा रहे हैं। फिनटेक, एआई और डिजिटल क्षेत्र में सहयोग की संभावना मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि सायप्रस यूरोप, पूर्वी भूमध्यसागर और मध्यपूर्व का महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार है, जबकि महाराष्ट्र भारत की आर्थिक प्रगति का केंद्र है। उन्होंने कहा कि फिनटेक, डिजिटल भुगतान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्टार्टअप, रक्षा उत्पादन, स्वच्छ ऊर्जा, अनुसंधान और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना ने वैश्विक स्तर पर उदाहरण प्रस्तुत किया है और भारत-सायप्रस साझेदारी सीमापार वित्तीय लेन-देन और डिजिटल नवाचार के लिए नए रास्ते खोलेगी। मुंबई में खुलेगा ‘सायप्रस ट्रेड सेंटर’ सायप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलिडेस ने घोषणा की कि भारत और सायप्रस के आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के लिए मुंबई में “सायप्रस ट्रेड सेंटर” स्थापित किया जाएगा, जो 1 सितंबर से कार्य शुरू करेगा। उन्होंने कहा कि यह केंद्र भारतीय कंपनियों को यूरोपीय बाजारों में प्रवेश दिलाने में मदद करेगा। सायप्रस यूरोपीय संघ और यूरोजोन का सदस्य होने के कारण 45 करोड़ उपभोक्ताओं वाले यूरोपीय बाजार तक पहुंच का प्रभावी माध्यम बन सकता है। उन्होंने कहा कि कम कॉर्पोरेट टैक्स, पारदर्शी नियम और अंग्रेजी आधारित कानूनी व्यवस्था भारतीय कंपनियों के लिए सायप्रस को आकर्षक बनाती है। डिजिटल तकनीक, एआई, फिनटेक, नवीकरणीय ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, पर्यटन और समुद्री सेवाओं में सहयोग की बड़ी संभावनाएं हैं। छह समझौतों पर हुए हस्ताक्षर इस बिजनेस फोरम में व्यापार, निवेश, रक्षा, बैंकिंग और तकनीक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए छह समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इनमें साइप्रस चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री और फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के बीच उद्योग एवं व्यापार सहयोग समझौता, इन्वेस्ट साइप्रस और फिक्की के बीच निवेश प्रोत्साहन समझौता, तथा भारतीय उद्योग परिसंघ शामिल हैं। और सायप्रस चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के बीच औद्योगिक सहयोग समझौता शामिल है। इसके अलावा यूरोबैंक और फिक्की के बीच बैंकिंग सहयोग समझौता, सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स और साइप्रस डिफेंस एंड स्पेस इंडस्ट्री क्लस्टर के बीच रक्षा एवं अंतरिक्ष उद्योग सहयोग समझौता, तथा सप्तंग लैब प्रा.लि. और चैनल आईटी लिमिटेड के बीच तकनीकी सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।