
मुंबई। भारतीय संविधान के शिल्पकार और भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के नाम पर प्रतिष्ठित लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस (LSE) में एक शैक्षणिक चेयर (अध्यासन) स्थापित करने का महत्वपूर्ण निर्णय बुधवार को राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया। इस बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने की। इस चेयर के माध्यम से डॉ. आंबेडकर के नाम पर डॉक्टरेट (पीएचडी) के लिए छात्रवृत्तियां भी प्रदान की जाएंगी। इस पहल का उद्देश्य डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों और कार्यों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक पहचान दिलाना है। साथ ही सामाजिक न्याय, संवैधानिक लोकतंत्र, आर्थिक समानता और मानवाधिकार जैसे विषयों पर वैश्विक स्तर का शोध केंद्र विकसित करना भी इसका प्रमुख लक्ष्य है। इस चेयर के अंतर्गत संविधान और लोकतंत्र, सामाजिक समानता, आर्थिक लोकतंत्र और पुनर्वितरण नीतियां, श्रमिक अधिकार, संघीय व्यवस्था, सार्वजनिक वित्त और समावेशी शासन जैसे विषयों पर बहु-विषयक (इंटरडिसिप्लिनरी) शोध को प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके अलावा वार्षिक व्याख्यानमाला, सेमिनार और शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, साथ ही शोध प्रकाशनों और अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग को भी बढ़ावा दिया जाएगा। लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में कानून, शासन, अंतरराष्ट्रीय विकास, दर्शनशास्त्र, अर्थशास्त्र और सार्वजनिक नीति जैसे क्षेत्रों के विशेषज्ञ प्राध्यापक इस चेयर से जुड़े रहेंगे। पहले दस वर्षों तक चेयर के लिए चयन LSE के वर्तमान प्राध्यापकों में से किया जाएगा, जबकि भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुली चयन प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इस चेयर की स्थापना के लिए राज्य सरकार द्वारा 30 लाख पाउंड (लगभग 37 करोड़ रुपये से अधिक) का एकमुश्त निधि प्रदान किया जाएगा। इसके साथ ही महाराष्ट्र सरकार, LSE और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (BARTI) के समन्वय से 10 पीएचडी छात्रवृत्तियां देने का निर्णय लिया गया है। प्रत्येक पीएचडी का कालावधि चार वर्ष का होगा। पहली छात्रवृत्ति शैक्षणिक वर्ष 2027-28 से और दूसरी 2029-30 से शुरू की जाएगी। छात्रवृत्ति के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की चयन प्रक्रिया LSE की समिति द्वारा की जाएगी। महाराष्ट्र के अनुसूचित जाति वर्ग के इच्छुक उम्मीदवारों को इस योजना के तहत आवेदन करते समय अपनी रुचि स्पष्ट रूप से दर्ज करनी होगी। पहले 10 छात्रवृत्तियों के लिए वित्तीय सहायता महाराष्ट्र सरकार और LSE के बीच 50:50 अनुपात में साझा की जाएगी। वर्ष 2027-28 में प्रवेश लेने वाले एक छात्र पर लगभग 1.91 लाख पाउंड (करीब 2.36 करोड़ रुपये) का खर्च अनुमानित है, जिसमें से आधा खर्च LSE द्वारा वहन किया जाएगा। इस छात्रवृत्ति कार्यक्रम के संचालन के लिए महाराष्ट्र सरकार, BARTI और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) किया जाएगा, जिसे मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी दे दी गई है। यह निर्णय डॉ. आंबेडकर के वैचारिक योगदान को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।




