Saturday, April 25, 2026
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राहुल गांधी ने आरएसएस को कहा- ‘राष्ट्रीय सरेंडर संघ’, राम माधव के बयान पर घमासान

नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ नेता राम माधव द्वारा अमेरिका में एक पैनल चर्चा के दौरान की गई टिप्पणियों की कड़ी आलोचना करते हुए उन्हें संगठन का वास्तविक स्वरूप उजागर करने वाला बताया। गांधी ने आरएसएस को राष्ट्रीय सरेंडर संघ कहा और संगठन को फर्जी करार दिया। राहुल गांधी ने एक पोस्ट में लिखा कि राष्ट्रीय आत्मसमर्पण संघ। नागपुर में फर्जी राष्ट्रवाद। अमेरिका में सरासर चाटुकारिता। राम माधव ने संघ का असली चेहरा उजागर कर दिया है। गांधी की ये टिप्पणी वाशिंगटन डीसी में हडसन इंस्टीट्यूट के न्यू इंडिया सम्मेलन में राजदूत कर्ट कैंपबेल और एलिजाबेथ थ्रेलकेल्ड के साथ राम माधव की पैनल चर्चा में भाग लेने के बाद आई है। इस चर्चा में उन्होंने “अमेरिका-भारत संबंधों के लिए नए रास्ते” विषय पर बात की। चर्चा के दौरान, राम माधव ने भारत की ऊर्जा और व्यापार नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष की इतनी आलोचना के बावजूद भारत ईरान और रूस से तेल खरीदना बंद करने पर सहमत हो गया। भारत ने बिना ज्यादा कुछ कहे 50 प्रतिशत टैरिफ पर सहमति जताई। तो आखिर भारत अमेरिका के साथ सहयोग करने के लिए पर्याप्त प्रयास कहाँ नहीं कर रहा है? इन टिप्पणियों के लिए आलोचना मिलने के बाद, राम माधव ने स्पष्टीकरण जारी कर तथ्यात्मक त्रुटियों को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि मैंने जो कहा वह गलत था। भारत ने रूस से तेल आयात बंद करने पर कभी सहमति नहीं जताई। साथ ही, उसने 50 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने का कड़ा विरोध किया। मैं दूसरे पैनलिस्ट के बयान का सीमित खंडन करने की कोशिश कर रहा था। लेकिन तथ्यात्मक रूप से गलत। मैं क्षमा चाहता हूँ। सरकार ने पहले पुष्टि की थी कि कच्चे तेल, तेल उत्पादों और एलपीजी के भंडार के मामले में भारत की स्थिति अच्छी है। सूत्रों ने संकेत दिया कि होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से आपूर्ति में संभावित बाधाओं की भरपाई के लिए भारत अन्य क्षेत्रों से आपूर्ति बढ़ाएगा। यह पूरा विवाद ऐसे समय सामने आया है जब भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को लेकर नई चर्चाएं चल रही हैं। राम माधव के बयान और उस पर राहुल गांधी की प्रतिक्रिया ने न केवल राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है, बल्कि भारत की विदेश नीति और ऊर्जा रणनीति पर भी बहस को तेज कर दिया है।

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