Saturday, April 25, 2026
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कानपुर कोर्ट में सनसनी: पांचवीं मंजिल से कूदकर युवा वकील ने दी जान, सुसाइड नोट ने झकझोरा समाज

कानपुर, उत्तर प्रदेश। कानपुर के न्यायिक परिसर में गुरुवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब युवा वकील प्रियांशु श्रीवास्तव ने कोर्ट भवन की पांचवीं मंजिल से छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली। इस घटना ने न सिर्फ कानूनी गलियारों को झकझोर दिया, बल्कि उनके द्वारा छोड़े गए सुसाइड नोट ने परिवार, समाज और परवरिश के तौर-तरीकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना से पहले सोशल मीडिया पर लिखा दर्द
मौत से ठीक पहले प्रियांशु ने व्हाट्सएप और सोशल मीडिया पर दो पन्नों का एक भावनात्मक सुसाइड नोट साझा किया। इस नोट में उन्होंने अपने पिता को अपनी मौत का जिम्मेदार ठहराया और लिखा कि वे बचपन से ही मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेलते आ रहे थे। नोट की एक पंक्ति— “पापा, आप जीत गए, मैं हार गया”—ने पूरे मामले को और भी भावुक बना दिया। उन्होंने यह तक लिखा कि उनके शव को पिता हाथ भी न लगाएं।
बचपन की दर्दनाक यादें बनीं वजह
सुसाइड नोट में प्रियांशु ने बचपन की एक घटना का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि महज छह साल की उम्र में आम का जूस पीने पर उनके पिता ने उन्हें निर्वस्त्र कर घर से बाहर निकाल दिया था। इस घटना ने उनके मन पर गहरा असर डाला, जो समय के साथ और गहराता गया। उन्होंने यह भी लिखा कि बड़े होने के बाद भी उन्हें लगातार अपमान, मारपीट और दबाव का सामना करना पड़ा, जिससे उनका आत्मसम्मान टूटता चला गया।
करियर और पहचान को लेकर भी था तनाव
रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रियांशु अपने पिता के साथ ही वकालत करते थे, लेकिन उन्हें खुद की पहचान न बनने का भी गहरा दुख था। उन्होंने नोट में लिखा कि वे दिनभर काम करते थे, फिर भी उन्हें कोई सम्मान या स्वतंत्र पहचान नहीं मिल रही थी।
कोर्ट परिसर में मचा हड़कंप
घटना के बाद कोर्ट परिसर में अफरा-तफरी मच गई। वकील, कर्मचारी और आम लोग बड़ी संख्या में मौके पर जुट गए। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
पुलिस जांच जारी
पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और सुसाइड नोट को जांच का मुख्य आधार बनाया है। अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की गहराई से जांच की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किन परिस्थितियों ने उन्हें इतना बड़ा कदम उठाने पर मजबूर किया।


समाज के लिए बड़ा सवाल
यह घटना सिर्फ एक आत्महत्या नहीं, बल्कि उस दबाव, मानसिक प्रताड़ना और संवाद की कमी की कहानी है, जो कई युवाओं की जिंदगी को भीतर ही भीतर तोड़ देती है। विशेषज्ञों का मानना है कि परिवार में संवाद, सहानुभूति और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना आज पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है—ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

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