
मुंबई। बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर से जुड़े भूमि मुआवज़ा विवाद में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए गोदरेज एंड बॉयस मैन्युफैक्चरिंग कंपनी लिमिटेड की याचिकाएं खारिज कर दीं। कोर्ट ने कहा कि भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन (एलएआरआर) प्राधिकरण द्वारा पारित प्रक्रियात्मक आदेश न्यायोचित हैं और उनमें दखल देने की आवश्यकता नहीं है। जस्टिस मनीष पिताले और जस्टिस श्रीराम शिरसाट की पीठ ने कंपनी की दो याचिकाओं को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि प्राधिकरण द्वारा राज्य को देरी से लिखित जवाब दाखिल करने की अनुमति देना और नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड गोडरेज एंड बॉयस मैन्युफैक्चरिंग कंपनी लिमिटेड को अपने जवाब में संशोधन कर ‘सीमाबद्धता’ का मुद्दा उठाने की छूट देना उचित है। यह मामला विक्रोली स्थित लगभग 10 एकड़ भूमि से जुड़ा है, जिसका अधिग्रहण 2022 के अवार्ड के तहत किया गया था। हालांकि अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन विवाद मुआवज़े की राशि को लेकर जारी है। संशोधनों के बाद कंपनी का दावा लगभग 572 करोड़ रुपये से बढ़कर करीब 1,972 करोड़ रुपये हो गया है। कंपनी ने दलील दी थी कि राज्य अधिकारियों को बार-बार अनुपस्थित रहने के बावजूद देरी से जवाब दाखिल करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए थी। साथ ही एनएचएसआरसीएल द्वारा लगभग दो साल बाद ‘लिमिटेशन’ का मुद्दा उठाने का भी विरोध किया गया था। वहीं, राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि एलएआरआर प्राधिकरण का गठन हाल ही में हुआ था और कलेक्टर कार्यालय के प्रतिनिधित्व के लिए कोई स्थापित तंत्र नहीं होने के कारण देरी हुई। राज्य ने यह भी कहा कि कंपनी द्वारा अपने दावे में बड़े संशोधन किए जाने के कारण विस्तृत जवाब देने का अवसर देना आवश्यक था। अदालत ने इन तर्कों को स्वीकार करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ने स्वयं अपने दावे में कई बार बदलाव किया है, जिससे मुआवज़े की राशि में भारी वृद्धि हुई। ऐसे में राज्य को जवाब देने की अनुमति देना न्यायसंगत है और इससे कंपनी को कोई वास्तविक नुकसान नहीं हुआ है। समय-सीमा के मुद्दे पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एलएआरआर प्राधिकरण को यह जांचने का पूरा अधिकार है कि मामला तय समय के भीतर दायर किया गया है या नहीं। साथ ही यह भी कहा कि एनएचएसआरसीएल को जवाब में संशोधन की अनुमति देने का अर्थ यह नहीं है कि उसकी दलील स्वीकार कर ली गई है; कंपनी इस पर अपना पक्ष रख सकती है। अंत में, हाई कोर्ट ने नासिक स्थित एलएआरआर प्राधिकरण को निर्देश दिया कि वह मुआवज़े से जुड़े मामले का निपटारा यथाशीघ्र, संभव हो तो छह महीने के भीतर करे। गौरतलब है कि मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत विक्रोली क्षेत्र में बनने वाली भूमिगत सुरंग का एक हिस्सा इसी भूमि से जुड़ा है, जिसके अधिग्रहण को लेकर गोदरेज और सरकार के बीच 2019 से कानूनी विवाद जारी है।




